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संस्कृत व्याकरण + शिक्षा मनोविज्ञान | UPTET CTET REET नोट्स 2026

संस्कृत व्याकरण + शिक्षा मनोविज्ञान | UPTET CTET REET नोट्स 2026
संस्कृत व्याकरण एवं शिक्षा मनोविज्ञान: पूर्ण अध्ययन मार्गदर्शिका

📚 संस्कृत व्याकरण एवं शिक्षा मनोविज्ञान

एक व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका - सभी सामग्री शामिल
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर, साहित्य, मनोविज्ञान - पूर्ण संकलन

भाग 1: संस्कृत व्याकरण (वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर)

सज्ञा, वर्ण एवं उच्चारण स्थान

प्रश्नउत्तर
संस्कृत में कारकों की संख्या कितनी है?6
हिंदी में कारकों की संख्या कितनी है?8
वर्ण के कितने भेद होते हैं?2 (स्वर और व्यंजन)
'स्वर' को क्या कहा जाता है?अच्
'व्यंजन' को क्या कहा जाता है?हल्
व्यंजनों की कुल संख्या कितनी होती है?33
माहेश्वर सूत्रों की संख्या कितनी है?14
'क' का सही रूप क्या है?क्+अ
'क्ष' किस वर्णों के मेल से बनता है?क्+ष
'ज्ञ' किस वर्णों के मेल से बनता है?ज्+ञ
वर्णों के समूह को क्या कहते हैं?वर्णमाला
स्वर के कितने भेद हैं?3 (ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत)
अन्तःस्थ व्यंजन कौन से हैं?य्, र्, ल्, व्
ऊष्म व्यंजन कौन से हैं?श्, ष्, स्, ह्
क-वर्ग का उच्चारण स्थान क्या है?कण्ठ
ट-वर्ग का उच्चारण स्थान क्या है?मूर्धन्य
त-वर्ग का उच्चारण स्थान क्या है?दन्त
प-वर्ग का उच्चारण स्थान क्या है?ओष्ठ
'ए' और 'ऐ' का उच्चारण स्थान क्या है?कण्ठतालु

सन्धि (Sandhi) - पूर्ण सूची

शब्द/सूत्रसन्धि का प्रकार/विच्छेद
इकोयणचियण सन्धि
आद्गुणःगुण सन्धि
नायकःनै+अकः (अयादि सन्धि)
पावकःपौ+अकः (अयादि सन्धि)
यद्यपियदि+अपि (यण सन्धि)
तथैवतथा+एव (वृद्धि सन्धि)
पवनःपो+अनः (अयादि सन्धि)
रवीन्द्रःरवि+इन्द्रः (दीर्घ सन्धि)
देवेन्द्रःदेव+इन्द्रः (गुण सन्धि)
वधूसवःवधू+उत्सवः
पितृणम्पितृ+ऋणम् (दीर्घ स्वर)
तवल्कारःतव+लकारः (गुण सन्धि)
हिमालयःहिम+आलयः (दीर्घ सन्धि)

भाग 1: समास एवं कारक (जारी)

समास (Samas) - पूर्ण सूची

शब्दसमास का प्रकार
यथाशक्तिअव्ययीभाव समास
कृष्णसर्पःकर्मधारय समास
पीताम्बरःबहुव्रीहि समास
पतरौद्वन्द्व समास
चतुरमुखःद्विग समास
पञ्चवटीद्विग समास
उपकृष्णम्अव्ययीभाव (उप का अर्थ: समीप)
दरिद्रवर्णम्अव्ययीभाव
प्रत्यहम्अव्ययीभाव
अधिहरिअव्ययीभाव
चक्रपाणिःबहुव्रीहि समास
भूतपूर्वःकेवल समास

कारक एवं विभक्ति (Karaka & Vibhakti) - सभी उदाहरण

  • श्री गणेशाय नमः: 'गणेशाय' में चतुर्थी विभक्ति है।
  • शिष्यः गुरुणा सह गच्छति: 'गुरुणा' में तृतीया विभक्ति है (सह के योग में)।
  • ग्राममभितः वनमस्ति: 'ग्रामम्' में द्वितीया विभक्ति है (अभितः के योग में)।
  • जीवेषु मानवाः श्रेष्ठाः: 'जीवेषु' में सप्तमी विभक्ति है।
  • सः पादेन खञ्जः अस्ति: 'पादेन' में तृतीया विभक्ति है (येनाङ्गविकारः सूत्र से)।
  • वक्षरात् पत्राणि पतन्ति: 'वक्षरात्' में अपादान कारक है।
  • विप्राय गददाति: 'विप्राय' में सम्प्रदान कारक है।

भाग 2: संस्कृत साहित्य एवं विविध - सभी बिंदु

  • अभिज्ञानशाकुन्तलम्: इस नाटक में 'विदूषक' का नाम माढव्य (माणवक) है। इसमें विष्कम्भक का प्रयोग चतुर्थ अंक में मिलता है।
  • शृङ्गार रस का स्थायी भाव: रति।
  • उत्प्रेक्षा अलंकार: जहाँ उपमेय में उपमान की सभावना की जाए।
  • शिशुपालवधम्: इसकी कथावस्तु महाभारत के सभापर्व से ली गई है।
  • कादम्बरी: इसके प्रमुख नायक चन्द्रापीड हैं।
  • उत्तररामचरितम्: इसमें विदूषक की भूमिका नगण्य (अभाव) है।
  • शफर: इसका अर्थ 'जल में चमकने वाली एक छोटी मछली' है।
  • षट्सप्तति: इसका अर्थ संख्या 76 है।
  • श्रीमद्भगवद्गीता: इसके अनुसार कर्मयोगी को लोकसंग्रह के लिए कर्म करना चाहिए।

भाग 3: शिक्षा मनोविज्ञान - पूर्ण विवरण

परीक्षा के प्रकार - सभी विवरण

1. निबन्धात्मक परीक्षा (Essay Type Test)

विशेषता: यह परीक्षा की सबसे प्राचीन प्रणाली है। इसमें विवेचनात्मक और वर्णनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।

गुण:

  • निर्माण में सरलता।
  • भावों और विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता।
  • मौलिक और सृजनात्मक चिंतन का परीक्षण।
  • भाषा क्षमताओं की जाँच।

दोष:

  • मूल्यांकन में विश्वसनीयता और वैधता का अभाव।
  • सम्पूर्ण पाठ्यक्रम की जाँच संभव नहीं।
  • रटकर याद करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा।

2. वस्तुनिष्ठ परीक्षा (Objective Type Test)

विशेषता: यह वैज्ञानिक और श्रेष्ठ प्रकार की परीक्षा है।

गुण: यह विश्वसनीय, वैध और तर्कसंगत होती है।

सीमा: इसके माध्यम से लेखन क्षमता और भाषाई अभिव्यक्ति की जाँच नहीं हो सकती।

3. अन्य प्रकार

  • खुली पुस्तक परीक्षा: इसमें छात्र पुस्तक देखकर उत्तर देने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
  • बंद पुस्तक परीक्षा: इसमें छात्र की तात्कालिक स्मृति की जाँच की जाती है।

भाग 3: उपलब्धि परीक्षण एवं संबंध (जारी)

उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test)

इसे 'निष्पादन परीक्षण' भी कहा जाता है। यह एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण है जो किसी विशेष क्षेत्र में अर्जित ज्ञान या कौशल की माप करता है।

उपलब्धि परीक्षण के प्रकार:

  1. नैदानिक उपलब्धि परीक्षण: विषय-वस्तु की कठिनाइयों का पता लगाना।
  2. विषय-गत उपलब्धि: किसी विशेष विषय की उपलब्धि की जाँच।
  3. सामान्य उपलब्धि: विभिन्न विषयों में अर्जित ज्ञान की समग्र जाँच।

बुद्धि, अभिक्षमता एवं उपलब्धि में संबंध

  • बुद्धि परीक्षण: छात्र की जन्मजात मानसिक शक्ति की जाँच करता है।
  • उपलब्धि परीक्षण: अर्जित ज्ञान की जाँच करता है और छात्र की प्रोन्नति में सहायक होता है।
  • अभिक्षमता परीक्षण: व्यक्ति की अंतःशक्ति और भविष्य में सफलता की संभावना की जाँच करता है।
  • निपुणता परीक्षण: व्यावसायिक क्षेत्र में अर्जित ज्ञान से संबंधित है।
महत्वपूर्ण सूत्र:
शैक्षिक लब्धि (E.Q.): (\frac{E.A. (शैक्षिक आय)}{C.A. (वास्तविक आय)} \times 100)

भाग 4: संस्कृत व्याकरण - अभ्यास प्रश्नावली (चुनिंदा तथ्य)

  • प्रत्याहारों की संख्या: 42
  • अनुनासिक वर्णों का उच्चारण स्थान: मुख-नासिका।
  • आयोगवाह वर्ण: संस्कृत में इनकी संख्या 4 मानी गई है।
  • उपसर्ग: संस्कृत में कुल 22 उपसर्ग होते हैं।

प्रत्यय (Pratyaya) - सभी उदाहरण

  • 'गत्वा' में क्त्वा प्रत्यय है।
  • 'गच्छन्' में शतृ प्रत्यय है।
  • 'पठनीयम्' में अनीयर प्रत्यय है।
  • 'हन्तुम्' में तुमुन् प्रत्यय है।

वाच्य परिवर्तन - पूर्ण विवरण

  • कर्तृवाच्य: में कर्ता प्रधान होता है (प्रथमा विभक्ति)।
  • कर्मवाच्य: में कर्म प्रधान होता है (प्रथमा विभक्ति) और कर्ता में तृतीया विभक्ति होती है।
  • भाववाच्य: में क्रिया प्रधान और हमेशा आत्मनेपद, एकवचन में होती है।

संस्कृत संख्याएँ (Sankhya) - पूर्ण सूची

संख्या शब्दमूल्य
एकोणविशति19
पञ्चाशत्50
षण्णवति96
त्रयस्त्रिंशत्33
शतम्100
सहस्रम्1000
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