सरकारी वेतन से नहीं तय होगी 'क्रीमी लेयर' — 2026 में भी यही नियम
ग्रुप 'सी' कर्मचारियों को बड़ी राहत। ₹8 लाख की सीमा में सैलरी और कृषि आय शामिल नहीं। मार्च 2026 सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद PSU/प्राइवेट कर्मचारियों के लिए भी स्थिति स्पष्ट।
उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवा (विशेषकर बेसिक शिक्षा विभाग) में कार्यरत OBC कर्मचारियों के बच्चों को NCL सर्टिफिकेट बनवाते समय अक्सर सैलरी को ₹8 लाख में जोड़ दिया जाता है। यह DoPT नियमों के विरुद्ध है। केंद्र सरकार के DoPT OM No. 36012/22/93-Estt.(SCT) dated 08.09.1993 और बाद के सभी अपडेट के अनुसार सरकारी वेतन (Salary) और कृषि आय (Agricultural Income) को क्रीमी लेयर की ₹8 लाख सीमा में बिल्कुल नहीं गिना जाता। केवल बिजनेस, किराया, निवेश, शेयर आदि अन्य स्रोतों की आय गिनी जाती है।
ग्रुप C (Group C) के लिए विशेष नियम
क्रीमी लेयर मुख्य रूप से माता-पिता के पद (Status) पर निर्भर करती है। यदि माता-पिता ग्रुप A या ग्रुप B के सीधी भर्ती अधिकारी नहीं हैं, तो बच्चे स्वतः NCL में आते हैं। UP Basic Shiksha में ज्यादातर कर्मचारी ग्रुप C में हैं, इसलिए उनके बच्चे जन्मजात NCL के पात्र हैं (जब तक अन्य स्रोतों से आय ₹8 लाख से अधिक न हो)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
| महत्वपूर्ण प्रश्न | आधिकारिक उत्तर |
|---|---|
| ₹10 लाख सैलरी पर पात्रता? | हाँ। सैलरी 8 लाख की लिमिट में नहीं आती। |
| खेती की आय? | पूरी तरह छूट। |
| तहसील की समस्या? | DoPT OM 08.09.1993 और मार्च 2026 SC फैसले का हवाला दें। |
| पति/पत्नी की आय? | नहीं गिनी जाती। केवल माता-पिता। |
प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
उत्तर प्रदेश में NCL सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आप edistrict.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं:
- पुराना OBC जाति प्रमाण पत्र
- आय संबंधी हलफनामा (Affidavit)
- 3 वर्षों के ITR / सैलरी स्लिप
- आधार और राशन कार्ड
- ग्राम प्रधान/लेखपाल सत्यापन