HEO
Executive
___
President,
राष्ट्रपति
परिभाषा
भारत का राष्ट्रपति भारतीय राज्य का प्रमुख (Head of the Indian State), देश का प्रथम नागरिक (First Citizen) होता है। वह राष्ट्र की एकता, अखंडता और एकजुटता (Unity, Integrity and Solidarity) के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। वह तीनों रक्षा बलों (Army, Navy, Air Force) का सर्वोच्च कमांडर (Supreme Commander) होता है।
पृष्ठभूमि
संविधान निर्माताओं ने ब्रिटेन के 'संवैधानिक राजतंत्र' (Constitutional Monarchy) और अमेरिका के 'अध्यक्षीय प्रणाली' (Presidential System) के बीच एक संतुलन स्थापित किया। भारत में एक 'गणतंत्र' (Republic) की स्थापना की गई, जहाँ राज्य का प्रमुख वंशानुगत नहीं, बल्कि एक निश्चित अवधि के लिए निर्वाचित होता है, लेकिन उसकी शक्तियां संसदीय प्रणाली के कारण नाममात्र (Titular / De Jure) होती हैं।
अवधारणा
नाममात्र की कार्यपालिका (Nominal Executive): वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) में निहित होती हैं।
संवैधानिक प्रहरी (Constitutional Sentinel): राष्ट्रपति केवल 'रबर स्टाम्प' नहीं है; उसके पास निलंबनकारी वीटो और सूचना मांगने का अधिकार है, जो उसे सरकार को चेतावनी देने और सलाह देने की शक्ति देता है।
विद्वान/Thinkers
डॉ. बी.आर. अंबेडकर: "भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति की स्थिति वैसी ही है जैसी ब्रिटिश संविधान के तहत राजा की है। वह राष्ट्र का प्रमुख है, कार्यपालिका का नहीं।"
जवाहरलाल नेहरू: "हमने राष्ट्रपति को कोई वास्तविक शक्ति नहीं दी है, लेकिन हमने उसके पद को अधिकार और गरिमा (Authority and Dignity) का पद बनाया है।"
संविधान अनुच्छेद (भाग V - संघ)
अनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग प्रत्यक्ष रूप से या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा।
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल (Electoral College)।
अनुच्छेद 55(3): चुनाव का तरीका - एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) प्रणाली द्वारा, और मतदान गुप्त (Secret Ballot) होगा।
अनुच्छेद 56: पदावधि (पद ग्रहण करने से 5 वर्ष) और उपराष्ट्रपति को त्यागपत्र।
अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन (Re-election) के लिए पात्रता।
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के रूप में चुनाव के लिए योग्यताएं।
अनुच्छेद 59(1): यदि कोई सांसद या विधायक राष्ट्रपति चुना जाता है, तो पद ग्रहण करने की तिथि से उसकी वह सीट रिक्त मान ली जाएगी।
अनुच्छेद 60: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा राष्ट्रपति को पद की शपथ।
अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की प्रक्रिया।
कानून व संशोधन
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 (1997 में संशोधित): इसी के तहत 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक और 15,000 की जमानत राशि का नियम तय किया गया।
42वाँ संविधान संशोधन, 1976: राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य (Bound) कर दिया गया।
44वाँ संविधान संशोधन, 1978: (जनता पार्टी सरकार द्वारा) राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार (Reconsideration) के लिए लौटा सकता है। लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह मानने के लिए वह बाध्य होगा।
2. Micro Topics (अति-गहन विश्लेषण)
निर्वाचक मंडल (Electoral College - Art 54): इसमें केवल निर्वाचित (Elected) सदस्य शामिल होते हैं: लोकसभा, राज्यसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
70वाँ संशोधन अधिनियम, 1992: इसके द्वारा दिल्ली (NCT) और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी निर्वाचक मंडल में शामिल किया गया (1 जून 1995 से प्रभावी)।
अपवाद: संसद के मनोनीत (Nominated) सदस्य और राज्य विधान परिषदों (Legislative Councils) के सदस्य चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
योग्यता और नामांकन (Eligibility & Nomination - Art 58): भारत का नागरिक हो, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, लोकसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो, और कोई 'लाभ का पद' (Office of Profit) न धारण करता हो।
नामांकन के लिए कम से कम 50 प्रस्तावक (Proposers) और 50 अनुमोदक (Seconders) होने चाहिए।
जमानत राशि (Security Deposit) 15,000 (RBI में जमा होती है)। यदि उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 भाग प्राप्त नहीं कर पाता है, तो जमानत जब्त हो जाती है।
त्यागपत्र और रिक्ति (Resignation & Vacancy):
राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है (अनुच्छेद 56(1)(a))।
विशेष (Art 56(2)): उपराष्ट्रपति इस त्यागपत्र की सूचना तत्काल लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) को देगा।
रिक्ति होने पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है। यदि उपराष्ट्रपति का पद रिक्त है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है। (ऐसा 1969 में एम. हिदायतुल्लाह के समय हुआ था)।
महाभियोग की प्रक्रिया (Impeachment - Art 61):
एकमात्र आधार: "संविधान का उल्लंघन" (Violation of the Constitution) - जिसे संविधान में कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है।
प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में शुरू हो सकती है (1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर और 14 दिन का नोटिस)। इसे दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या के 2/3 विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए। (आज तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगा है)।
महत्वपूर्ण: संसद के मनोनीत सदस्य जो चुनाव में भाग नहीं लेते, वे महाभियोग में भाग लेते हैं। लेकिन विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य जो चुनाव में भाग लेते हैं, वे महाभियोग में भाग नहीं लेते हैं।
वीटो शक्तियां (Veto Powers): संसद द्वारा पारित विधेयक पर (अनुच्छेद 111): राष्ट्रपति स्वीकृति दे सकता है, रोक सकता है, या (धन विधेयक को छोड़कर) पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।
धन विधेयक (Money Bill): यह राष्ट्रपति की 'पूर्व सिफारिश' (Prior recommendation) से ही लोकसभा में पेश होता है, इसलिए वह इसे पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकता।
विभिन्न शक्तियां:
अनुच्छेद 77: भारत सरकार के सभी कार्य औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम पर किए जाते हैं।
अनुच्छेद 72 (क्षमादान/Pardoning Power): क्षमा (Pardon), लघुकरण (Commute), परिहार (Remit), विराम (Respite), प्रविलंबन (Reprieve)।
अनुच्छेद 108: दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाना।
अनुच्छेद 123 (अध्यादेश/Ordinance): जब संसद सत्र में न हो। संसद के दोबारा समवेत होने (Reassembly) के 6 सप्ताह के भीतर इसे मंजूरी मिलनी चाहिए। वह इसे कभी भी वापस ले सकता है।
अनुच्छेद 143: सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांगना।
अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) और जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन और घोषणा का विशेष अधिकार।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: 42वें और 44वें संविधान संशोधनों ने राष्ट्रपति की शक्तियों को किस प्रकार पुनर्परिभाषित किया?
Prelims: निर्वाचक मंडल (Electoral College) अधूरा होने (विधानसभा भंग होने) की स्थिति में क्या राष्ट्रपति का चुनाव रोका जा सकता है? (उत्तर: नहीं, अनुच्छेद 71(4) के अनुसार चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती)।
Prelims: चुनाव संबंधी सभी विवादों की जांच और निर्णय कौन करता है? (उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय, जिसका निर्णय अंतिम होता है)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है, इसकी सूचना उपराष्ट्रपति सबसे पहले किसे देता है? (उत्तर: लोकसभा अध्यक्ष को - अनुच्छेद 56(2))।
प्रश्न: राष्ट्रपति की वर्तमान सैलरी कितनी है? (उत्तर: 5 लाख रुपये प्रतिमाह, जो भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित है)।
प्रश्न: दिल्ली और पुडुचेरी को राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया? (उत्तर: 70वाँ संविधान संशोधन, 1992)।
CAPF / CDS
प्रश्न: राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाने के लिए कौन सा बहुमत आवश्यक है? (उत्तर: सदन की 'कुल सदस्यता' का दो-तिहाई - 2/3rd of Total Membership)।
प्रश्न: क्या राष्ट्रपति धन विधेयक (Money Bill) को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है? (उत्तर: नहीं)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: किस मामले में राष्ट्रपति के चुनाव में 'द्वितीय वरीयता' (Second Preference) के मतों की गिनती करनी पड़ी थी? (उत्तर: 1969 में वी.वी. गिरि के चुनाव में)।
प्रश्न: किस राष्ट्रपति ने भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक, 1986 पर 'पॉकेट वीटो' (Pocket Veto) का प्रयोग किया था? (उत्तर: ज्ञानी जैल सिंह)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
यदि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति के चुनाव को 'अवैध' घोषित कर दिया जाता है, तो उस फैसले की तारीख से पहले राष्ट्रपति के रूप में उसके द्वारा किए गए कार्य अमान्य (Invalid) नहीं होते हैं, वे प्रभावी रहते हैं।
UPPSC Fact
नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जो निर्विरोध (Unopposed) चुने गए थे।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दो कार्यकाल (1950-1962) पूरे किए।
NET Fact
अमेरिका के राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 वर्ष होता है और वह अधिकतम 2 बार चुना जा सकता है, जबकि भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है और अनुच्छेद 57 के तहत वह कितनी भी बार (Any number of times) पुनर्निर्वाचित हो सकता है।
Match the Following
Statement Based Questions (Advance Level)
कथन: राज्य विधान परिषदों (Legislative Councils) के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर सकते हैं। (गलत - वे चुनाव में भाग नहीं लेते हैं)।
कथन: राष्ट्रपति के महाभियोग में संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं। (सही - चुनाव में भाग नहीं लेते, लेकिन महाभियोग में लेते हैं)।
कथन: राष्ट्रपति को प्राप्त क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72) एक विवेकाधीन शक्ति (Discretionary Power) है और न्यायालय इसकी समीक्षा नहीं कर सकता। (गलत - सुप्रीम कोर्ट ने 'एपुरू सुधाकर वाद' में कहा है कि यह विवेकाधीन नहीं है (मंत्रिपरिषद की सलाह पर होती है) और मनमानी होने पर इसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
के.एम. मुंशी (K.M. Munshi): "संविधान ने राष्ट्रपति को केवल एक 'रबर स्टाम्प' नहीं बनाया है। वह एक ऐसा 'संवैधानिक प्रहरी' (Constitutional Sentinel) है जो संकट के समय राष्ट्र की रक्षा कर सकता है।"
डॉ. बी.आर. अंबेडकर (महाभियोग पर): "महाभियोग कोई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध 'अर्ध-न्यायिक' (Quasi-judicial) और राजनीतिक प्रक्रिया है।"
सुप्रीम कोर्ट (शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य, 1974): "हमारे संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल की संतुष्टि (Satisfaction) का अर्थ वास्तव में मंत्रिपरिषद की संतुष्टि है, क्योंकि कार्यपालिका शक्ति का वास्तविक प्रयोग उनके द्वारा किया जाता है।"
संवैधानिक अपवाद एवं विशेषाधिकार)
अवधारणा (Situational Discretion / परिस्थितिजन्य विवेक)
संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के पास कोई 'संवैधानिक विवेकाधिकार' (Constitutional Discretion - जो राज्यपाल के पास है) नहीं है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में वह अपने विवेक (Situational Discretion) का प्रयोग करता है:
त्रिशंकु लोकसभा (Hung Parliament): जब चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले, तो प्रधानमंत्री की नियुक्ति में।
सरकार का पतन: जब मंत्रिपरिषद लोकसभा में अपना विश्वास मत (No-confidence) हार जाए, और सलाह दे कि लोकसभा भंग कर दी जाए, तो राष्ट्रपति उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है, वह वैकल्पिक सरकार तलाश सकता है।
कार्यवाहक सरकार (Caretaker Government): जब सरकार बहुमत खो देती है, तो वह केवल 'कार्यवाहक' रह जाती है। उसकी प्रमुख नीतिगत सलाहों को मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं है।
संविधान अनुच्छेद एवं संशोधन (विशिष्ट शक्तियां)
अनुच्छेद 201 (राज्य के विधेयकों पर वीटो): जब राज्यपाल किसी राज्य विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित (Reserve) करता है (अनुच्छेद 200 के तहत), तो राष्ट्रपति उस पर पूरी तरह से स्वतंत्र है। वह उसे अनिश्चित काल के लिए रोक सकता है (Absolute Veto) और यदि राज्य विधानमंडल उसे पुनर्विचार के बाद दोबारा भी भेजे, तब भी राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं है (संसद के मामले में वह बाध्य होता है)।
अनुच्छेद 361 (राष्ट्रपति के विशेषाधिकार/Immunities):
राष्ट्रपति को उसके कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय द्वारा किसी भी कृत्य के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता।
उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) शुरू नहीं की जा सकती (गिरफ्तारी या कारावास नहीं हो सकता)।
सिविल कार्यवाही (Civil Proceedings) उसके व्यक्तिगत कार्यों के लिए शुरू की जा सकती है, लेकिन इसके लिए 2 महीने का पूर्व नोटिस (2 Months Notice) देना अनिवार्य है।
24वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1971: इस संशोधन ने राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य (Bound) कर दिया कि वह "संविधान संशोधन विधेयक" (Constitutional Amendment Bill - Art 368) पर अपनी स्वीकृति देगा ही (यानी इसमें वह कोई वीटो प्रयोग नहीं कर सकता)।
2. Micro Topics (गहन तकनीकी बिंदु)
राष्ट्रपति के चुनाव में मत-मूल्य (Value of Vote) का फॉर्मूला: समानता (Uniformity) सुनिश्चित करने के लिए फॉर्मूले बनाए गए हैं:
एक विधायक (MLA) के मत का मूल्य: = \frac{\text{राज्य की कुल जनसंख्या}}{\text{राज्य विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्य}} \times \frac{1}{1000}
एक सांसद (MP) के मत का मूल्य: = \frac{\text{सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य}}{\text{संसद के दोनों सदनों के कुल निर्वाचित सदस्य}}
विशेष (84वाँ संशोधन, 2001): इस फॉर्मूले में 'जनसंख्या' का आधार 1971 की जनगणना को माना जाता है और यह वर्ष 2026 तक के लिए स्थिर (Frozen) है।
वीटो शक्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण (Veto Powers Analysis):
आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto): विधेयक को सुरक्षित रख लेना (वह अधिनियम नहीं बन पाता)। यह केवल (a) गैर-सरकारी सदस्य (Private Member) के विधेयक पर, या (b) जब पुरानी कैबिनेट इस्तीफा दे दे और नई कैबिनेट विधेयक को रोकने की सलाह दे, तब प्रयोग होता है।
निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto): पुनर्विचार के लिए लौटाना। (लेकिन भारत में यदि संसद साधारण बहुमत से ही इसे दोबारा पास कर दे, तो वीटो खत्म हो जाता है)।
पॉकेट वीटो (Pocket Veto): न तो स्वीकृति देना, न अस्वीकार करना, और न ही लौटाना (संविधान में राष्ट्रपति के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है)।
(Note: भारतीय राष्ट्रपति के पास अमेरिकी राष्ट्रपति की तरह 'विशेषित वीटो' (Qualified Veto) नहीं है, जिसे विधायिका द्वारा उच्च बहुमत से ओवरराइड किया जा सके)।
क्षमादान की शक्तियों में सूक्ष्म अंतर (Art 72 vs Art 161): राष्ट्रपति (Art 72) और राज्यपाल (Art 161) दोनों को क्षमादान की शक्ति है, लेकिन 2 बड़े अंतर हैं:
मृत्युदंड (Death Sentence): केवल राष्ट्रपति पूरी तरह से 'क्षमा' (Pardon) कर सकता है, राज्यपाल नहीं (हालांकि राज्यपाल मृत्युदंड को निलंबित या कम (Commute) कर सकता है)।
कोर्ट-मार्शल (सैन्य अदालत): सैन्य अदालतों द्वारा दी गई सजा को केवल राष्ट्रपति क्षमा कर सकता है, राज्यपाल को इस पर कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: "भारतीय राष्ट्रपति न तो रबर स्टाम्प है और न ही निरंकुश तानाशाह।" संवैधानिक और परिस्थितिजन्य विवेकाधिकारों के संदर्भ में चर्चा करें।
Prelims: भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में, प्रत्येक विधानसभा के निर्वाचित सदस्य के मतों की संख्या कैसे तय होती है? (1971 की जनसंख्या के फॉर्मूले पर आधारित ट्रिकी प्रश्न)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: राष्ट्रपति के खिलाफ कोई सिविल (दीवानी) मुकदमा शुरू करने से पहले कितने दिन का नोटिस देना अनिवार्य है? (उत्तर: 2 महीने / 60 दिन - अनुच्छेद 361)।
प्रश्न: राष्ट्रपति की 'पॉकेट वीटो' की शक्ति का आधार क्या है? (उत्तर: अनुच्छेद 111 में राष्ट्रपति को निर्णय लेने के लिए 'कोई समय-सीमा' न दिया जाना)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
केहर सिंह बनाम भारत संघ (1989): इस लैंडमार्क वाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान मांगते समय दोषी को राष्ट्रपति के समक्ष 'मौखिक सुनवाई' (Oral Hearing) का कोई अधिकार नहीं है। राष्ट्रपति अपने विवेक से साक्ष्यों की जांच कर सकता है, जो न्यायालय से भिन्न हो सकती है।
प्रश्न: क्या राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी वीटो शक्ति का प्रयोग कर सकता है? (उत्तर: नहीं, 24वें संशोधन के बाद से उसे अनिवार्य रूप से हस्ताक्षर करने होते हैं)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
शपथ का सूक्ष्म बिंदु: राष्ट्रपति संविधान और विधि के "परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण" (Preserve, Protect and Defend) की शपथ लेता है, जबकि अन्य मंत्री संविधान के प्रति "सच्ची श्रद्धा और निष्ठा" की शपथ लेते हैं।
राष्ट्रपति चुनाव में यदि किसी राज्य की विधानसभा भंग है, तो उसके सदस्य मतदान नहीं कर सकते, लेकिन उस राज्य के सांसदों (MPs) के मत-मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
Match the Following (Veto Types)
Statement Based Questions (Ultra-Advance Level)
कथन: जब राज्य विधानमंडल का कोई विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित किया जाता है, और राज्य विधानमंडल इसे पुनर्विचार के बाद दोबारा राष्ट्रपति को भेजता है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी स्वीकृति देने के लिए बाध्य है। (गलत - अनुच्छेद 201 के तहत वह राज्य विधेयकों पर बाध्य नहीं है)।
कथन: 1971 के 24वें संशोधन ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया कि वह संविधान संशोधन विधेयक को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। (गलत - 24वें संशोधन ने उसे स्वीकृति देने के लिए बाध्य किया है; पुनर्विचार वाला नियम 44वें संशोधन से 'साधारण विधेयकों' के लिए आया था)।
कथन: भारतीय संविधान के तहत 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' (Acting President) के रूप में कार्य करने वाला उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के सभी विशेषाधिकारों और वेतन का हकदार होता है। (सही - अनुच्छेद 65)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
दुर्गा दास बसु (D.D. Basu): "राष्ट्रपति का पद एक ऐसा उपकरण है जो आपातकाल या राजनीतिक अस्थिरता के समय संविधान की रक्षा करता है। जब तक मंत्रिपरिषद के पास बहुमत है, वह एक संवैधानिक प्रमुख है, लेकिन बहुमत टूटते ही उसके 'निहित विवेकाधिकार' जाग्रत हो जाते हैं।"
सर्वोच्च न्यायालय (मारू राम बनाम भारत संघ, 1980): "अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति भले ही व्यापक हो, लेकिन यह कोई व्यक्तिगत कृपा (Private Grace) नहीं है। इसका प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही किया जाना चाहिए, और यह न्यायालय की समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है यदि इसे मनमाने ढंग से प्रयोग किया गया हो।"
संवैधानिक सिद्धांत और विशिष्ट शक्तियां)
अवधारणा (Constitutional Doctrines related to President)
प्रसादपर्यंत का सिद्धांत (Doctrine of Pleasure - अनुच्छेद 310): ब्रिटिश कानून से लिया गया यह सिद्धांत कहता है कि संघ के रक्षा कर्मी और सिविल सेवक (IAS/IPS आदि) 'राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत' (During the pleasure of the President) अपना पद धारण करते हैं। राष्ट्रपति उन्हें किसी भी समय हटा सकता है (अनुच्छेद 311 के सुरक्षा उपायों के अधीन)।
सूचना का अधिकार (Right to be Informed - अनुच्छेद 78): राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच प्रधानमंत्री एक 'कड़ी' (Bridge) का कार्य करता है। यह प्रधानमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है कि वह प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से जुड़ी हर जानकारी राष्ट्रपति को दे। यदि कोई मंत्री व्यक्तिगत रूप से निर्णय ले लेता है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 78(c) के तहत प्रधानमंत्री को निर्देश दे सकता है कि वह उस मामले को पूरी मंत्रिपरिषद (Cabinet) के समक्ष रखे।
विशिष्ट शक्तियां (Diplomatic & Executive)
कूटनीतिक (Diplomatic): सभी अंतर्राष्ट्रीय संधियां (Treaties) और समझौते राष्ट्रपति के नाम पर किए जाते हैं। (हालाँकि, उन पर अंततः संसद की मंजूरी आवश्यक होती है)।
कार्यकारी नियुक्तियां (Executive Appointments): राष्ट्रपति सीधे तौर पर अनुच्छेद 76 (महान्यायवादी/AG), अनुच्छेद 148 (CAG), अनुच्छेद 280 (वित्त आयोग), और अनुच्छेद 324 (मुख्य चुनाव आयुक्त) आदि की नियुक्ति करता है।
2. Micro Topics (अति-गहन और तकनीकी बिंदु)
चुनाव जीतने का गणित (Electoral Quota): आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली में केवल सबसे अधिक वोट पाना काफी नहीं है, बल्कि एक निश्चित 'कोटा' प्राप्त करना अनिवार्य है। $$ \text{निर्वाचक कोटा (Electoral Quota)} = \left( \frac{\text{कुल वैध मत (Total Valid Votes)}}{1 + 1} \right) + 1 $$ यानी राष्ट्रपति बनने के लिए कुल वैध मतों के 50% + 1 वोट प्राप्त करना अनिवार्य है।
कार्यकाल समाप्त होने का अपवाद (अनुच्छेद 56(1)(c) - The 'Continuance' Clause): सामान्यतः राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। लेकिन, यदि किसी कारणवश नए राष्ट्रपति का चुनाव समय पर नहीं हो पाता है, तो पुराना राष्ट्रपति अपने 5 वर्ष पूरे होने के बाद भी तब तक पद पर बना रहेगा, जब तक उसका उत्तराधिकारी कार्यभार नहीं संभाल लेता। (ध्यान दें: इस विशेष स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति नहीं बनता है; उपराष्ट्रपति केवल मृत्यु, त्यागपत्र या महाभियोग के समय ही पद संभालता है)।
लैंडमार्क वाद: यू.एन. राव बनाम इंदिरा गांधी (1971):
विवाद: क्या लोकसभा भंग होने के बाद भी मंत्रिपरिषद सत्ता में रह सकती है? क्या राष्ट्रपति अकेले शासन चला सकता है?
निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 74 (राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी) अनिवार्य (Mandatory) है। लोकसभा भंग होने पर भी मंत्रिपरिषद बनी रहेगी, क्योंकि राष्ट्रपति अपनी कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के नहीं कर सकता।
राष्ट्रपति का विशेषाधिकार (Rule Making Power): अनुच्छेद 77(3) के तहत राष्ट्रपति भारत सरकार के कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाने और मंत्रियों के बीच कार्यों के आवंटन (Allocation of Business Rules) के लिए नियम बनाता है।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: "अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री पर एक कर्तव्य आरोपित करता है और राष्ट्रपति को कार्यपालिका पर नज़र रखने का एक सशक्त साधन (Tool of surveillance) प्रदान करता है।" विश्लेषण करें।
Prelims: भारतीय संविधान के तहत 'प्रसादपर्यंत का सिद्धांत' (Doctrine of Pleasure) किस अनुच्छेद में वर्णित है और यह किस पर लागू होता है? (उत्तर: अनुच्छेद 310, सिविल और रक्षा सेवाओं पर)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: यदि राष्ट्रपति के पद का चुनाव समय पर संपन्न नहीं हो पाता, तो 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद पद कौन संभालेगा? (उत्तर: निवर्तमान (Outgoing) राष्ट्रपति ही पद पर बना रहेगा, उपराष्ट्रपति नहीं)।
प्रश्न: राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) किस प्रकार की शक्ति है? (उत्तर: विधायी शक्ति / Legislative Power, यह कार्यकारी शक्ति नहीं है)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: यू.एन. राव बनाम इंदिरा गांधी वाद (1971) का मुख्य निष्कर्ष क्या था? (उत्तर: राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह हमेशा अनिवार्य है, यहां तक कि लोकसभा भंग होने के बाद भी)।
प्रश्न: राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए 'कार्यों के आवंटन नियमों' (Allocation of Business Rules) को किस अनुच्छेद के तहत शक्ति प्राप्त है? (उत्तर: अनुच्छेद 77(3))।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग (Integral Part) है (अनुच्छेद 79), क्योंकि उसके हस्ताक्षर के बिना कोई विधेयक कानून नहीं बन सकता, फिर भी वह संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं होता और उसकी बैठकों में भाग नहीं लेता।
UPPSC Fact
विधेयकों पर वीटो का समय: संविधान में राष्ट्रपति के लिए किसी विधेयक पर स्वीकृति देने के लिए "कोई समय सीमा" निर्धारित नहीं की गई है (अमेरिका में 10 दिन का समय होता है)। इसी कारण भारत में 'पॉकेट वीटो' का जन्म होता है।
Match the Following (Articles Refresher)
Statement Based Questions (Ultra-Advance Level)
कथन: राष्ट्रपति के चुनाव में विवाद होने पर चुनाव आयोग की सलाह पर सर्वोच्च न्यायालय निर्णय लेता है। (गलत - अनुच्छेद 71 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय सीधे और स्वतंत्र रूप से जांच करता है और निर्णय लेता है, इसमें चुनाव आयोग की कोई भूमिका नहीं है)।
कथन: यदि कोई राज्य विधानमंडल राष्ट्रपति के पुनर्विचार के लिए लौटाए गए विधेयक को पुनः पारित करके राष्ट्रपति को भेजता है, तो राष्ट्रपति उस पर स्वीकृति देने के लिए बाध्य है। (गलत - वह केवल संसद के विधेयकों पर बाध्य है, राज्य विधेयकों (अनुच्छेद 201) पर नहीं)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
ग्रेनविले ऑस्टिन: "राष्ट्रपति का पद संविधान निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती था; वे एक ऐसा राष्ट्र प्रमुख चाहते थे जिसके पास कोई वास्तविक सत्ता न हो, फिर भी जो संकट के समय राष्ट्र की धुरी बन सके।"
सुप्रीम कोर्ट (राम जवाया कपूर बनाम पंजाब राज्य, 1955): "हमारे संविधान ने कार्यपालिका के अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति को अपनाया है, लेकिन यह ब्रिटिश मॉडल पर आधारित एक संसदीय कार्यपालिका है। राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रतीक है, लेकिन वह राष्ट्र पर शासन नहीं करता।"
आपातकालीन और विधायी शक्तियों के अपवाद)
अवधारणा (Emergency Powers & The 'Cabinet' Catch)
राष्ट्रपति को भाग XVIII के तहत तीन प्रकार के आपातकाल (अनुच्छेद 352, 356, 360) लगाने की शक्ति प्राप्त है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा संवैधानिक पेंच है।
मूल संविधान में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर भी राष्ट्रीय आपातकाल लगा सकता था (जैसा 1975 में हुआ)। लेकिन 44वें संविधान संशोधन, 1978 ने यह अनिवार्य कर दिया कि राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल केवल तभी घोषित करेगा जब उसे "कैबिनेट की लिखित सिफारिश" (Written recommendation of the Cabinet) प्राप्त हो।
विशिष्ट संवैधानिक तथ्य ('Cabinet' शब्द का प्रयोग):
पूरे मूल संविधान में कहीं भी 'कैबिनेट' (मंत्रिमंडल) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। 44वें संशोधन द्वारा इसे केवल और केवल अनुच्छेद 352(3) में शामिल किया गया। (बाकी जगह 'मंत्रिपरिषद' / Council of Ministers का उल्लेख है)।
कानून व न्यायिक सिद्धांत (Ordinance Making Power Limits)
राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) संसद की 'समानांतर विधायी शक्ति' (Parallel power of legislation) नहीं है। यह केवल असाधारण परिस्थितियों से निपटने के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अध्यादेश का प्रयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए या विधायिका को बाईपास करने के लिए किया जाता है, तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
2. Micro Topics (दुर्लभ और तकनीकी बिंदु)
अध्यादेशों का बार-बार प्रख्यापन (Re-promulgation of Ordinances):
डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायिका का सामना किए बिना बार-बार उसी अध्यादेश को जारी करना "संविधान के साथ धोखाधड़ी" (Fraud on the Constitution) है।
कृष्ण कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017): सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति (या राज्यपाल) द्वारा अध्यादेश जारी करने का निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के पूर्ण अधीन है। अध्यादेशों से कोई 'स्थायी अधिकार' स्वतः उत्पन्न नहीं हो जाते।
चुनाव की वैधता और रिक्ति (अनुच्छेद 71(4)): यदि किसी राज्य की विधानसभा भंग (Dissolve) हो चुकी है, तो उस राज्य के विधायक राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं दे पाते। ऐसे में क्या निर्वाचक मंडल (Electoral College) 'अधूरा' मानकर चुनाव रोका जा सकता है? संविधान का 11वाँ संशोधन (1961) स्पष्ट करता है कि निर्वाचक मंडल में किसी भी रिक्ति (Vacancy) के आधार पर राष्ट्रपति के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
अनुच्छेद 71(2) - कृत्यों की वैधता: यदि सुप्रीम कोर्ट किसी कारणवश राष्ट्रपति के चुनाव को 'अवैध' (Void) घोषित कर देता है, तो पद से हटने से पहले उस राष्ट्रपति द्वारा किए गए सभी शासकीय कार्य (जैसे किसी बिल पर हस्ताक्षर या नियुक्ति) वैध बने रहते हैं और उन्हें अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।
1969 का ऐतिहासिक चुनाव (वी.वी. गिरि बनाम नीलम संजीव रेड्डी): यह भारत के इतिहास का एकमात्र ऐसा राष्ट्रपति चुनाव था जहाँ:
'अंतरात्मा की आवाज' (Conscience vote) पर मतदान हुआ।
जीत के लिए प्रथम वरीयता के मतों से 'कोटा' पूरा नहीं हो पाया, इसलिए पहली और एकमात्र बार द्वितीय वरीयता (Second Preference) के मतों की गिनती करनी पड़ी, जिसके बाद निर्दलीय उम्मीदवार वी.वी. गिरि विजयी हुए।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: "राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति कार्यपालिका द्वारा विधायिका के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण है।" कृष्ण कुमार सिंह वाद के आलोक में चर्चा करें।
Prelims: भारतीय संविधान में 'कैबिनेट' (Cabinet) शब्द का प्रयोग कितनी बार और किस अनुच्छेद में किया गया है? (उत्तर: केवल एक बार, अनुच्छेद 352 में)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: नीलम संजीव रेड्डी भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जो... (उत्तर: एक बार चुनाव हारने के बाद, अगली बार (1977 में) निर्विरोध (Unopposed) चुने गए)।
प्रश्न: राष्ट्रपति की शपथ (अनुच्छेद 60) में "संविधान के संरक्षण" के अलावा और क्या शामिल है? (उत्तर: "भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा" - 'Service and well-being of the people')।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: डी.सी. वाधवा वाद (1987) का संबंध भारतीय राजव्यवस्था के किस विषय से है? (उत्तर: अध्यादेशों के बार-बार प्रख्यापन / Re-promulgation of Ordinances से)।
प्रश्न: संविधान का कौन सा संशोधन स्पष्ट करता है कि निर्वाचक मंडल के अपूर्ण होने पर राष्ट्रपति चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती? (उत्तर: 11वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1961)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
मंत्रियों की बर्खास्तगी: मंत्री "राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत" (During the pleasure of the President - Art 75(2)) पद धारण करते हैं। लेकिन राष्ट्रपति अपनी मर्जी से किसी मंत्री को नहीं हटा सकता; वह ऐसा केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर ही कर सकता है।
UPPSC Fact
राष्ट्रपति भवन (जिसे पहले वायसराय हाउस कहा जाता था) का डिजाइन एडविन लुटियंस (Edwin Lutyens) ने तैयार किया था, लेकिन इसके निर्माण के बाद इसमें निवास करने वाले पहले भारतीय सी. राजगोपालाचारी थे (गवर्नर जनरल के रूप में), और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
Match the Following (Extreme Legal Landmark)
Statement Based Questions (Ultra-Advance Level)
कथन: 42वें संविधान संशोधन ने राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह को बाध्यकारी बना दिया, जबकि 44वें संशोधन ने राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल (Art 352) केवल कैबिनेट की लिखित सिफारिश पर लगाने के लिए बाध्य किया। (सही - दोनों संशोधन राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियों को नियंत्रित करते हैं)।
कथन: यदि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के चुनाव को रद्द कर देता है, तो चुनाव रद्द होने की घोषणा और राष्ट्रपति के पदभार ग्रहण करने के बीच राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित सभी कानून स्वतः निरस्त हो जाते हैं। (गलत - अनुच्छेद 71(2) के अनुसार वे कार्य पूरी तरह वैध रहते हैं)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ (कृष्ण कुमार सिंह वाद, 2017): "अध्यादेश जारी करने की शक्ति को विधायिका के सामान्य कानून बनाने की शक्ति के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यदि कार्यपालिका विधायिका को दरकिनार करती है, तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का घोर उल्लंघन है।"
डॉ. राजेंद्र प्रसाद (संविधान सभा के अंतिम भाषण में): "संविधान मशीन की तरह एक निर्जीव वस्तु है। इसमें वे लोग जान फूंकते हैं जो इसे नियंत्रित करते हैं। भारत को आज जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह है ऐसे ईमानदार लोग जो देश के हित को सर्वोपरि रखें।" (UPSC निबंध के लिए सर्वश्रेष्ठ उद्धरण)।
पूर्व सिफारिश और प्रतिवेदन)
अवधारणा (Bills Requiring Prior Recommendation)
कुछ विधेयक इतने संवेदनशील होते हैं कि उन्हें संसद में पेश करने से पहले ही राष्ट्रपति की 'पूर्व अनुमति' (Prior Recommendation/Consent) लेनी पड़ती है। यदि अनुमति के बिना पास हो भी जाएं और बाद में राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर दे, तो भी वे अवैध नहीं माने जाते (अनुच्छेद 255)।
वे विधेयक जिन्हें पूर्व अनुमति चाहिए:
अनुच्छेद 3: नए राज्यों का निर्माण, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
अनुच्छेद 110: धन विधेयक (Money Bill)।
अनुच्छेद 117(1) & (3): वित्त विधेयक (Financial Bills)।
अनुच्छेद 274: ऐसे कराधान (Taxation) वाले विधेयक जिनसे राज्य भी प्रभावित होते हों।
अनुच्छेद 304(b): राज्यों के बीच व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य के विधेयक (इनके लिए राज्य विधानमंडल में पेश होने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति चाहिए)।
संवैधानिक दायित्व (Reports laid before Parliament)
राष्ट्रपति का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह विभिन्न आयोगों की रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाए:
अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (केंद्रीय बजट)।
अनुच्छेद 151: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट।
अनुच्छेद 281: वित्त आयोग (Finance Commission) की सिफारिशें।
अनुच्छेद 323: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की वार्षिक रिपोर्ट।
अनुच्छेद 338, 338A, 338B: क्रमशः SC, ST और OBC के राष्ट्रीय आयोगों की रिपोर्ट।
2. Micro Topics (दुर्लभ अनुच्छेद एवं ऐतिहासिक अपवाद)
अनुच्छेद 70 (अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन): संविधान में यह तो लिखा था कि राष्ट्रपति न हो तो उपराष्ट्रपति काम करेगा, लेकिन यदि दोनों न हों तो क्या होगा? इसका उत्तर संविधान में नहीं, बल्कि अनुच्छेद 70 में था, जिसने संसद को शक्ति दी कि वह कानून बनाए। इसी का प्रयोग करके संसद ने 'राष्ट्रपति (कृत्यों का निर्वहन) अधिनियम, 1969' पारित किया, जिसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को राष्ट्रपति का पद संभालने का अधिकार मिला।
एकमात्र 'कार्यवाहक' पेंच (V.V. Giri Case): 1969 में जब डॉ. जाकिर हुसैन का निधन हुआ, तो उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। लेकिन वी.वी. गिरि स्वयं राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते थे। इसलिए उन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति रहते हुए उपराष्ट्रपति के पद से त्यागपत्र दे दिया, ताकि वे चुनाव लड़ सकें। इसी के बाद CJI एम. हिदायतुल्लाह कुछ समय के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे।
राष्ट्रपति और वीटो (राज्य का संविधान संशोधन): राज्यों के विधानमंडल संविधान संशोधन विधेयक (Art 368) की शुरुआत नहीं कर सकते। लेकिन जब संसद ऐसा संविधान संशोधन पारित करती है जो 'संघीय ढांचे' (Federal Structure) को प्रभावित करता है, तो उसे कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुमोदित (Ratify) किया जाना चाहिए। इसके बाद जब यह राष्ट्रपति के पास जाता है, तो राष्ट्रपति 24वें संशोधन के तहत इस पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य होता है।
4. PYQ Coverage
UPSC
Prelims: निम्नलिखित में से किन रिपोर्टों को भारत का राष्ट्रपति संसद के पटल पर रखवाता है? (कूट: 1. CAG, 2. वित्त आयोग, 3. PAC, 4. UPSC)। (उत्तर: 1, 2 और 4। PAC की रिपोर्ट स्पीकर के पास जाती है, राष्ट्रपति के पास नहीं)।
Mains: "अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के पुनर्गठन में राष्ट्रपति की भूमिका मात्र एक डाकघर (Post office) की नहीं है।" स्पष्ट करें।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: किस राष्ट्रपति की मृत्यु उनके कार्यकाल (Term in office) के दौरान हुई थी? (उत्तर: डॉ. जाकिर हुसैन (1969) और फखरुद्दीन अली अहमद (1977))।
प्रश्न: कौन से राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) रहे थे? (उत्तर: नीलम संजीव रेड्डी)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: भारत के संविधान का अनुच्छेद 255 किससे संबंधित है? (उत्तर: पूर्व सिफारिश (Prior recommendation) की प्रक्रियात्मक कमियों को ठीक करने से)।
प्रश्न: व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य के विधेयकों (Art 304) के लिए किसकी पूर्व स्वीकृति आवश्यक है? (उत्तर: भारत के राष्ट्रपति की)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना (Vote Counting): मतगणना कई 'राउंड' (Rounds) में होती है। प्रथम वरीयता (First Preference) के मतों में यदि किसी को 'कोटा' (50%+1) नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है, और उसके मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता (Second Preference) के मतों को बचे हुए उम्मीदवारों में ट्रांसफर (Transfer/वितरित) कर दिया जाता है। इसे ही 'एकल संक्रमणीय मत' (Single Transferable Vote) कहते हैं।
UPPSC Fact
राष्ट्रपति की पेंशन: सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रपति को उसके अंतिम आहरित वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता है (वर्तमान में 2.5 लाख प्रतिमाह), साथ ही सुसज्जित आवास और चिकित्सा सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं।
वैज्ञानिक राष्ट्रपति: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (2002-2007) भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जो राजनीतिज्ञ नहीं थे, बल्कि एक गैर-राजनीतिक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से आए थे।
Match the Following (Historical Trivia)
Statement Based Questions (Absolute Final Level)
कथन: अनुच्छेद 112 के तहत 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (बजट) वित्त मंत्री द्वारा अपनी मर्जी से पेश किया जाता है। (गलत - बजट संविधान के तहत राष्ट्रपति द्वारा संसद के पटल पर रखवाया जाता है, वित्त मंत्री केवल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में इसे पेश करता है)।
कथन: राज्य की सीमाओं में परिवर्तन करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति प्रभावित राज्य के विधानमंडल के पास विचार जानने के लिए भेजता है, और राज्य का विचार राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होता है। (गलत - राष्ट्रपति विचार जानने के लिए भेजता है, लेकिन उनका विचार मानने के लिए वह बिल्कुल भी बाध्य नहीं है)।
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सर अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर: "राष्ट्रपति का पद गरिमा का पद है। वह देश का सर्वोच्च अधिकारी है, लेकिन वह अंग्रेजी राजा की तरह कभी भी 'कोई गलत काम नहीं कर सकता' (The King can do no wrong), क्योंकि वह हमेशा अपने मंत्रियों की सलाह पर कार्य करता है।"
रामस्वामी वेंकटरमण (पूर्व राष्ट्रपति): "भारत का राष्ट्रपति न तो एक कार्यकारी अध्यक्ष (Executive President) है और न ही एक रबड़ स्टाम्प। वह एक 'आपातकालीन लैंप' (Emergency Lamp) की तरह है जो केवल तब जलता है जब सामान्य राजनीतिक मशीनरी विफल हो जाती है।"
संसदीय नियंत्रण एवं राष्ट्रपति की सक्रियता)
अवधारणा (Presidential Activism / राष्ट्रपति की सक्रियता)
संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति रबर स्टाम्प है, लेकिन 1990 के दशक में 'गठबंधन की राजनीति' (Coalition Era) के दौरान राष्ट्रपतियों ने 44वें संशोधन की "पुनर्विचार" (Reconsideration) शक्ति का उपयोग करके सक्रियता दिखाई।
के.आर. नारायणन का ऐतिहासिक कदम: 1997 में इन्द्र कुमार गुजराल सरकार ने उत्तर प्रदेश (कल्याण सिंह सरकार) और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने बिहार (राबड़ी देवी सरकार) में अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लगाने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने दोनों बार कैबिनेट की सिफारिश को 'पुनर्विचार' के लिए लौटा दिया और दोनों ही बार कैबिनेट को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। यह भारत के इतिहास में 'राष्ट्रपति की नैतिक शक्ति' (Moral Power) का सबसे बड़ा उदाहरण है।
संविधान अनुच्छेद (संसदीय अभिभाषण और विदेशी अधिकारिता)
अनुच्छेद 86: राष्ट्रपति का संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने और संदेश (Messages) भेजने का अधिकार। (यदि कोई महत्वपूर्ण बिल अटका हो, तो राष्ट्रपति संसद को संदेश भेज सकता है)।
अनुच्छेद 87 (विशेष अभिभाषण - Special Address): प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र की शुरुआत में और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र में राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है। इसे ही 'धन्यवाद प्रस्ताव' (Motion of Thanks) के रूप में पास किया जाता है। यदि यह लोकसभा में गिर जाए, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
अनुच्छेद 260 (भारत के बाहर के राज्यक्षेत्रों के संबंध में अधिकारिता): भारत सरकार किसी विदेशी राज्य के साथ समझौता करके उस राज्य की विधायी, कार्यकारी या न्यायिक शक्तियां अपने हाथ में ले सकती है, और यह सब राष्ट्रपति के नाम पर किया जाता है।
2. Micro Topics (विशिष्ट आयोग और प्रशासनिक अधिकार)
संविधान के तहत राष्ट्रपति द्वारा गठित किए जाने वाले विशेष आयोग (Very Important for NET):
अनुच्छेद 263: केंद्र-राज्य समन्वय के लिए 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (पहली बार 1990 में गठित)।
अनुच्छेद 339: अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन राष्ट्रपति करता है (जैसे ढेबर आयोग 1960, दिलीप सिंह भूरिया आयोग 2002)।
अनुच्छेद 340: पिछड़े वर्गों (OBC) की स्थिति की जांच के लिए आयोग का गठन (जैसे काका कालेलकर 1953 और मंडल आयोग 1979 राष्ट्रपति द्वारा ही बनाए गए थे)।
अनुच्छेद 344: राजभाषा आयोग (Official Language Commission) का गठन राष्ट्रपति करता है (पहला बी.जी. खेर आयोग 1955)।
केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन (Administration of UTs - Art 239): प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन सीधे राष्ट्रपति द्वारा चलाया जाता है। वह एक 'प्रशासक' (Administrator/Lieutenant Governor) की नियुक्ति करता है, जो राष्ट्रपति के एक 'एजेंट' के रूप में कार्य करता है, न कि राज्य के राज्यपाल (Head of State) की तरह।
अनुच्छेद 77(2) का तकनीकी पेंच (Authentication of Orders): भारत सरकार के सभी आदेश राष्ट्रपति के नाम पर जारी होते हैं, लेकिन राष्ट्रपति उन पर स्वयं हस्ताक्षर नहीं करता। वे आदेश ऐसे अधिकारियों द्वारा "प्रमाणीकृत" (Authenticated) किए जाते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति अपने नियमों में तय करता है (जैसे सचिव या संयुक्त सचिव)।
राष्ट्रपति और SC/ST क्षेत्र (5वीं और 6ठी अनुसूची): किसी भी क्षेत्र को 'अनुसूचित क्षेत्र' (Scheduled Area) घोषित करने का एकमात्र अधिकार राष्ट्रपति के पास है। वह राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ऐसे क्षेत्रों की सीमाओं में परिवर्तन कर सकता है।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: "राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण (अनुच्छेद 87) सरकार की नीतियों का दर्पण है, न कि राष्ट्रपति के व्यक्तिगत विचार।" इस कथन का परीक्षण करें।
Prelims: निम्नलिखित में से किन आयोगों/परिषदों का गठन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है? (1. अंतर-राज्यीय परिषद, 2. राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC), 3. वित्त आयोग, 4. क्षेत्रीय परिषदें)। (उत्तर: केवल 1 और 3। NDC और क्षेत्रीय परिषदें वैधानिक/कार्यकारी हैं, जिनका गठन राष्ट्रपति नहीं करता)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति अंतर-राज्यीय परिषद का गठन करता है? (उत्तर: अनुच्छेद 263)।
प्रश्न: राष्ट्रपति को पद की शपथ कौन दिलाता है, और यदि वह अनुपस्थित हो तो कौन दिलाएगा? (उत्तर: भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI), और उसकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश (Senior-most Judge) - अनुच्छेद 60)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति को 'पिछड़ा वर्ग आयोग' (OBC Commission) नियुक्त करने की शक्ति प्राप्त है? (उत्तर: अनुच्छेद 340)।
प्रश्न: "राष्ट्रपति की स्थिति एक गाड़ी में 'पांचवें पहिए' (Fifth wheel) के समान नहीं है।" यह कथन किसका है? (उत्तर: जवाहरलाल नेहरू)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
मंत्री का व्यक्तिगत उत्तरदायित्व (Individual Responsibility): अनुच्छेद 75(2) के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। इसका अर्थ है कि यदि प्रधानमंत्री किसी मंत्री से असंतुष्ट है, तो वह राष्ट्रपति को उस मंत्री को बर्खास्त (Dismiss) करने की सलाह दे सकता है, और राष्ट्रपति उसे तुरंत हटा देगा।
UPPSC Fact
राष्ट्रपति पद के चुनाव में विवाद का समय: चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के 30 दिनों के भीतर केवल सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है। यह याचिका कम से कम 20 मतदाताओं (सांसदों/विधायकों) या स्वयं उम्मीदवार द्वारा दायर की जानी चाहिए। (राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952)।
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Statement Based Questions (The Ultimate Level)
कथन: राष्ट्रपति द्वारा संसद में दिए जाने वाले 'विशेष अभिभाषण' (Special Address) की विषय-वस्तु (Content) स्वयं राष्ट्रपति द्वारा अपने विवेक से तैयार की जाती है। (गलत - इसे पूरी तरह से केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा तैयार किया जाता है, यह सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की नीतियों का दस्तावेज़ होता है)।
कथन: केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासक (Administrator) राज्य के राज्यपाल के समान उसी हैसियत और शक्तियों का आनंद लेता है। (गलत - प्रशासक केवल राष्ट्रपति का एजेंट होता है, राज्य का प्रमुख नहीं)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
पंडित जवाहरलाल नेहरू: "हमने राष्ट्रपति को एक वास्तविक शासक नहीं बनाया है, बल्कि हमने उसे ऐसा स्थान दिया है जो दलीय राजनीति से ऊपर है, जो राष्ट्र के अस्तित्व की निरंतरता (Continuity) का प्रतिनिधित्व करता है।"
एम.वी. पायली (M.V. Pylee): अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Constitutional Government in India' में वे लिखते हैं - "भारत का राष्ट्रपति कोई 'स्वर्णिम शून्य' (Golden Cipher) नहीं है। उसके पास चेताने, प्रोत्साहित करने और परामर्श देने का पूरा अधिकार है।"
संविधान सभा की बहस और न्यायिक गाइडलाइंस)
अवधारणा (Direct vs Indirect Election - संविधान सभा की बहस)
संविधान सभा में प्रो. के.टी. शाह जैसे सदस्यों ने मांग की थी कि राष्ट्रपति का चुनाव 'प्रत्यक्ष' (जनता द्वारा सीधे) होना चाहिए। लेकिन पंडित नेहरू और डॉ. अंबेडकर ने इसका विरोध किया।
तर्क: यदि राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा चुना जाता, तो वह खुद को प्रधानमंत्री के बराबर या उससे अधिक शक्तिशाली मानता, जिससे सत्ता के दो केंद्र (Two Centers of Power) बन जाते और संसदीय प्रणाली नष्ट हो जाती। साथ ही, इतने बड़े निर्वाचक मंडल का चुनाव कराना आर्थिक रूप से अव्यवहारिक था।
लैंडमार्क वाद: शत्रुघ्न चौहान बनाम भारत संघ (2014) - 'Mercy Petition Delay'
विवाद: राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान याचिका (Mercy Petition) के निपटारे के लिए कोई समय-सीमा नहीं है। कई राष्ट्रपतियों ने सालों तक याचिकाओं पर फैसला नहीं लिया।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: यदि राष्ट्रपति द्वारा मृत्युदंड प्राप्त कैदी की क्षमादान याचिका पर निर्णय लेने में "अत्यधिक और अकारण देरी" (Inordinate and Unexplained Delay) होती है, तो यह कैदी के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार - मानसिक यातना के रूप में) का उल्लंघन है। इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट सीधे मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल सकता है।
2. Micro Topics (अति-सूक्ष्म तकनीकी अपवाद)
अनुच्छेद 361(1) का छिपा हुआ अपवाद (The Hidden Proviso): हम जानते हैं कि राष्ट्रपति अपने कार्यों के लिए किसी न्यायालय के प्रति जवाबदेह नहीं है। लेकिन इसके नीचे एक 'परन्तुक' (Proviso) छिपा है: "राष्ट्रपति के आचरण की समीक्षा किसी ऐसे न्यायालय, न्यायाधिकरण या निकाय द्वारा की जा सकती है, जिसे संसद के किसी सदन ने अनुच्छेद 61 (महाभियोग) के तहत आरोपों की जांच के लिए नियुक्त किया हो।" (यह तथ्य UGC NET का सबसे बड़ा बाउंसर है)।
अध्यादेश की सीमाएं (Limitations on Ordinances - Art 123):
क्या अध्यादेश पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू हो सकता है? (उत्तर: हाँ, यह पिछली तारीख से भी लागू किया जा सकता है)।
क्या अध्यादेश कर कानूनों (Tax Laws) को बदल सकता है? (उत्तर: हाँ)।
क्या राष्ट्रपति अध्यादेश के माध्यम से संविधान में संशोधन (Constitutional Amendment) कर सकता है? (उत्तर: बिल्कुल नहीं)।
वेतन और भत्तों का अपवाद (अनुच्छेद 59(4)): राष्ट्रपति की उपलब्धियां और भत्ते (Emoluments and Allowances) उसके कार्यकाल के दौरान कम (Diminished) नहीं किए जा सकते। यहाँ तक कि वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट के जजों और बाकी सभी के वेतन काटे जा सकते हैं, तब भी राष्ट्रपति का वेतन नहीं काटा जा सकता।
कार्यालय का लाभ (Office of Profit) और राष्ट्रपति: अनुच्छेद 58 कहता है कि राष्ट्रपति उम्मीदवार लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। लेकिन अनुच्छेद 58(2) स्पष्ट करता है कि वर्तमान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, किसी राज्य का राज्यपाल और केंद्र या राज्य का मंत्री 'लाभ के पद' पर नहीं माने जाते हैं, इसलिए वे बिना इस्तीफा दिए राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकते हैं।
4. PYQ Coverage
UPSC
Mains: "मृत्युदंड की क्षमादान याचिकाओं के निस्तारण में राष्ट्रपति द्वारा की गई अत्यधिक देरी न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।" शत्रुघ्न चौहान वाद के आलोक में चर्चा करें।
Prelims: निम्नलिखित में से क्या राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति के दायरे से बाहर है? (1. मौलिक अधिकारों को कम करना, 2. कर लगाना, 3. संविधान संशोधन)। (उत्तर: 1 और 3 बाहर हैं। अध्यादेश से मौलिक अधिकार नहीं छीने जा सकते और न ही संविधान बदला जा सकता है)।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: किस राष्ट्रपति ने 'लाभ का पद (निवारण) संशोधन विधेयक, 2006' (Office of Profit Bill) को पुनर्विचार के लिए संसद को वापस लौटा दिया था? (उत्तर: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम)।
प्रश्न: क्या वित्तीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति के वेतन में कटौती की जा सकती है? (उत्तर: नहीं, अनुच्छेद 59(4) के तहत)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science/Law)
प्रश्न: राष्ट्रपति चुनाव में 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' (Proportional Representation) प्रणाली का मुख्य उद्देश्य क्या है? (उत्तर: विभिन्न राज्यों के बीच और राज्यों तथा केंद्र के बीच मत-मूल्य में एकरूपता (Uniformity) और समतुल्यता (Parity) सुनिश्चित करना - अनुच्छेद 55)।
प्रश्न: क्या किसी अध्यादेश को पिछली तारीख (Retrospective effect) से लागू किया जा सकता है? (उत्तर: हाँ)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
धन विधेयक (Money Bill) की वापसी: राष्ट्रपति धन विधेयक को स्वीकृति दे सकता है या रोक सकता है, लेकिन उसे 'पुनर्विचार' के लिए वापस नहीं भेज सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि धन विधेयक लोकसभा में राष्ट्रपति की 'पूर्व अनुमति' (Prior Consent) से ही पेश किया जाता है। जब उसने खुद अनुमति दी है, तो वह उसे वापस कैसे भेजेगा!
Match the Following (The Deepest Layer)
Statement Based Questions (The Absolute Final Boss Level)
कथन: राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए अध्यादेश के माध्यम से संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को निरस्त (Repeal) या संशोधित किया जा सकता है। (सही - अध्यादेश की शक्ति संसद के कानून के बिल्कुल बराबर होती है)।
कथन: राष्ट्रपति अपने पद की अवधि समाप्त होने के बाद भी तब तक पद पर बना रहता है जब तक कि उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण नहीं कर लेता। (गलत - वह तब तक बना रहता है जब तक कि 'नया निर्वाचित राष्ट्रपति' (Successor) पद ग्रहण नहीं कर लेता। उपराष्ट्रपति यहाँ emergency) से निपटना है, जब संसद का सत्र न चल रहा हो। यह कार्यपालिका की निरंकुशता का साधन नहीं है।"
प्रो. के.टी. शाह (संविधान सभा की बहस में आलोचना करते हुए): "आप एक ऐसा राष्ट्रपति बना रहे हैं जो केवल मंत्रियों की हां में हां मिलाएगा। यह पद एक महंगी सजावट (Expensive decoration) से अधिक कुछ नहीं होगा।"
वैचारिक टकराव और सैन्य/कूटनीतिक सीमाएं)
अवधारणा (The First Presidential Conflict: Prasad vs. Nehru)
राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर सबसे पहली और सबसे बड़ी बहस संविधान लागू होने के तुरंत बाद 'हिंदू कोड बिल' (Hindu Code Bill) को लेकर हुई थी।
टकराव: प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति अपनी सहमति देने या रोकने (Veto) के लिए स्वतंत्र है, जबकि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का कहना था कि राष्ट्रपति ब्रिटिश सम्राट की तरह कैबिनेट की सलाह मानने के लिए बाध्य है। अंततः भारत के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल 'एम.सी. सीतलवाड़' ने राय दी कि राष्ट्रपति कैबिनेट की सलाह से बंधा हुआ है। (यही कारण है कि बाद में इंदिरा गांधी को 42वां संशोधन लाना पड़ा ताकि इस बहस को हमेशा के लिए कानूनी रूप से खत्म किया जा सके)।
सैन्य शक्तियां (Military Powers - The Catch)
राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर है और वह युद्ध की घोषणा (Declaration of War) और शांति समझौते (Conclusion of Peace) करता है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा पेंच यह है कि राष्ट्रपति की यह शक्ति पूर्ण नहीं है; यह "संसद की मंजूरी के पूर्ण अधीन" (Strictly subject to Parliamentary approval) है।
2. Micro Topics (चुनावी हैक्स और प्रक्रियात्मक अपवाद)
दल-बदल कानून और 'ह्विप' (Anti-Defection & Whip - The BIG Exception): राष्ट्रपति के चुनाव में संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) लागू नहीं होती है। कोई भी राजनीतिक दल अपने सांसदों/विधायकों को किसी विशेष उम्मीदवार को वोट देने के लिए 'ह्विप' (Whip/सचेतक) जारी नहीं कर सकता। चुनाव 'गुप्त मतदान' (Secret Ballot) द्वारा होता है, इसलिए विधायक/सांसद क्रॉस-वोटिंग (Cross-voting) करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उन पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती।
बैलट पेपर का रंग और EVM का प्रयोग न होना: राष्ट्रपति के चुनाव में EVM (Electronic Voting Machine) का प्रयोग नहीं किया जाता है। चुनाव बैलट पेपर से होता है और मत-मूल्य अलग-अलग होने के कारण रंग भी अलग होते हैं:
सांसदों (MPs) के लिए बैलट पेपर का रंग हरा (Green) होता है।
विधायकों (MLAs) के लिए बैलट पेपर का रंग गुलाबी (Pink) होता है।
प्रस्तावक 50 क्यों किए गए? (The 'Dharti Pakad' Case): 1997 से पहले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए केवल 10 प्रस्तावक और 10 अनुमोदक चाहिए थे। इसका फायदा उठाकर 'काका जोगिंदर सिंह' (जिन्हें धरती पकड़ कहा जाता था) जैसे अगंभीर उम्मीदवार बार-बार चुनाव लड़कर रिकॉर्ड बनाते थे। ऐसे अगंभीर उम्मीदवारों को रोकने के लिए ही 1997 के अध्यादेश/अधिनियम द्वारा प्रस्तावक/अनुमोदक की संख्या 50-50 और जमानत राशि ₹15,000 की गई।
राज्यसभा में मनोनयन (अनुच्छेद 80) और 'खेल' का विवाद: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है। इसके केवल 4 आधार हैं: साहित्य (Literature), विज्ञान (Science), कला (Art) और समाज सेवा (Social Service)।
UPSC/NET फंसाता है: संविधान में 'खेल' (Sports) शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। जब सचिन तेंदुलकर को मनोनीत किया गया, तो विवाद हुआ था, लेकिन उसे 'समाज सेवा' और 'कला' (खेल को एक कला मानकर) के व्यापक अर्थ के तहत वैध ठहराया गया।
एंग्लो-इंडियन मनोनयन की समाप्ति (अनुच्छेद 331): पहले राष्ट्रपति लोकसभा में 2 एंग्लो-इंडियन सदस्यों को मनोनीत करता था। लेकिन 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा इस प्रावधान को आगे नहीं बढ़ाया गया और अब यह शक्ति समाप्त हो गई है।
4. PYQ Coverage
UPSC
Prelims: भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संदर्भ में, क्या राजनीतिक दल अपने सदस्यों को ह्विप जारी कर सकते हैं? (उत्तर: नहीं, यह पूर्णतः निषिद्ध है)।
Mains: "हिंदू कोड बिल पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पंडित नेहरू के बीच का वैचारिक मतभेद, भारतीय राजव्यवस्था में राष्ट्रपति की शक्तियों को परिभाषित करने का पहला प्रयास था।" टिप्पणी करें।
UPPSC / RO/ARO
प्रश्न: राज्यसभा में मनोनयन के 4 आधारों का सही क्रम/संयोजन क्या है? (उत्तर: साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा - LASS)।
प्रश्न: भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में मतपत्र (Ballot Paper) का उपयोग किस रंग में किया जाता है? (उत्तर: सांसदों के लिए हरा, विधायकों के लिए गुलाबी)।
UGC NET / Assistant Professor (Political Science)
प्रश्न: किस संवैधानिक संशोधन द्वारा राष्ट्रपति की लोकसभा में 2 एंग्लो-इंडियन को मनोनीत करने की शक्ति को अप्रभावी कर दिया गया? (उत्तर: 104वाँ संशोधन, 2019)।
प्रश्न: यदि कोई उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में कुल वैध मतों का 1/6 भाग प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसकी ₹15,000 की जमानत राशि कहाँ जमा हो जाती है? (उत्तर: भारतीय रिज़र्व बैंक - RBI में)।
7. Prelims Facts
UPSC Fact
चुनाव का समय (अनुच्छेद 62): यदि वर्तमान राष्ट्रपति का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है, तो नए राष्ट्रपति का चुनाव 24 जुलाई से पहले ही हर हाल में संपन्न हो जाना चाहिए। यदि रिक्ति मृत्यु, त्यागपत्र या महाभियोग से हुई है, तो चुनाव 6 महीने के भीतर कराना अनिवार्य है।
कार्यवाहक राष्ट्रपति की शपथ: जब उपराष्ट्रपति या भारत का मुख्य न्यायाधीश 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' (Acting President) बनता है, तो वह अपने मूल पद की नहीं, बल्कि ठीक उसी तरह 'राष्ट्रपति के पद की शपथ' लेता है (अनुच्छेद 60 के तहत) जैसे एक नियमित राष्ट्रपति लेता है।
Match the Following (The Hidden Protocols)
Statement Based Questions (The Academic Everest)
कथन: भारत का राष्ट्रपति युद्ध की घोषणा अपने विवेकाधिकार से कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे कैबिनेट की लिखित सिफारिश चाहिए। (गलत - कैबिनेट की लिखित सिफारिश केवल अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल) के लिए चाहिए; युद्ध की घोषणा अंततः 'संसद' के अनुमोदन पर निर्भर है)।
कथन: राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले निर्वाचक मंडल (Electoral College) के सदस्यों को उनके राजनीतिक दल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वोट देना अनिवार्य है। (गलत - चुनाव दल-बदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर है)।
9. Thinkers & Quotes asked in various exam related this
एम.सी. सीतलवाड़ (भारत के प्रथम अटॉर्नी जनरल): (नेहरू-प्रसाद विवाद के संदर्भ में) "संविधान को समग्र रूप से पढ़ने पर यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति की स्थिति ब्रिटिश ताज (British Crown) के समान है। वह राष्ट्र का 'सर्वोच्च सजावटी हिस्सा' (Supreme decorative part) है, लेकिन सत्ता का केंद्र नहीं।"
सुप्रीम कोर्ट (पशुपति नाथ सुकुल बनाम नेम चंद्र जैन, 1984): "एक विधानसभा, जो भंग होने के कारण अस्तित्व में नहीं है, उसके सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान से वंचित रहेंगे। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत के राष्ट्रपति का पद रिक्त रखा जाए; चुनाव निर्धारित समय पर ही होगा।"