यात्रियों का पूर्ण, विस्तृत और कालानुक्रमिक क्रम (Ascending Chronological Order) है:
सही क्रम: 4 ➔ 3 ➔ 1 ➔ 2 (फाह्यान ➔ ह्वेनसांग ➔ इत्सिंग ➔ अल-बरूनी)
1. फाह्यान (Fa-Hien / Faxian) — 399–414 ईस्वी
मूल देश: चीन (चिन राजवंश)।
भारत आगमन का उद्देश्य: शुद्ध बौद्ध विनयपिटक और बौद्ध ग्रंथों की खोज।
समकालीन शासक: गुप्त राजा चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य'। (नोट: फाह्यान ने अपने यात्रा वृत्तांत में राजा के नाम का उल्लेख नहीं किया है)।
यात्रा मार्ग: स्थल मार्ग से भारत आया और ताम्रलिप्ति से समुद्री मार्ग (श्रीलंका, जावा होते हुए) से चीन लौटा।
प्रमुख ग्रंथ: 'फो-कुओ-की' (Fo-Kuo-Ki) अर्थात 'बौद्ध राज्यों का विवरण'।
मुख्य तथ्य:
इसने मध्य देश (ब्राह्मणों का देश) का वर्णन किया जहाँ लोग जीव हत्या नहीं करते थे और प्याज-लहसुन नहीं खाते थे।
चांडालों (अछूतों) का समाज से बाहर रहने और नगर में प्रवेश करते समय लकड़ी पीटने का पहला विस्तृत विवरण इसी ने दिया।
उसने बताया कि यहाँ की मुद्रा कौड़ियां (Cowries) थीं।
इसने 3 वर्ष पाटलिपुत्र में रहकर संस्कृत सीखी।
2. ह्वेनसांग (Hiuen Tsang / Xuanzang) — 629–645 ईस्वी
मूल देश: चीन (तांग राजवंश)।
उपाधियां: 'यात्रियों का राजकुमार', 'वर्तमान शाक्यमुनि', 'नीति का पंडित'।
भारत आगमन का उद्देश्य: नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध दर्शन का अध्ययन और बौद्ध ग्रंथ एकत्र करना।
समकालीन शासक: पुष्यभूति (वर्धन) वंश के राजा हर्षवर्धन। वह कामरूप के राजा भास्करवर्मा और चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के राज्य में भी गया।
यात्रा मार्ग: ताशकंद और समरकंद के स्थल मार्ग से आया और स्थल मार्ग से ही मध्य एशिया होते हुए लौटा।
प्रमुख ग्रंथ: 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) अर्थात 'पश्चिमी दुनिया का रिकॉर्ड'। (इसकी जीवनी इसके मित्र ह्वली (Hwui-Li) ने लिखी थी)।
मुख्य तथ्य:
इसने नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्ष अध्ययन और अध्यापन किया। उस समय वहाँ के कुलपति (Chancellor) आचार्य शीलभद्र थे।
हर्षवर्धन ने इसके सम्मान में कन्नौज की धार्मिक सभा (643 ईस्वी) और प्रयाग की छठवीं महामोक्ष परिषद का आयोजन किया था।
इसने भारतीय समाज को 7 जातियों में विभाजित बताया।
इसने शूद्रों को 'कृषक' (किसान) कहा।
डाकुओं ने इसे दो बार लूटा था (एक बार गंगा नदी में इसकी बलि देने की कोशिश भी की गई थी)।
3. इत्सिंग (I-Tsing / Yijing) — 671–695 ईस्वी
मूल देश: चीन (तांग राजवंश)।
भारत आगमन का उद्देश्य: बौद्ध भिक्षुओं के नियमों और विनयपिटक का अध्ययन।
समकालीन स्थिति: हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद का समय (उत्तर-गुप्त काल)।
यात्रा मार्ग: समुद्री मार्ग से समुद्री जहाजों द्वारा (सुमात्रा/श्रीविजया होते हुए) भारत आया और उसी मार्ग से लौटा।
प्रमुख ग्रंथ: 'ए रिकॉर्ड ऑफ द बुद्धिस्ट रिलिजन एज प्रैक्टिस्ड इन इंडिया एंड द मलय आर्किपेलागो'। इसने 'भारत और मलय द्वीपपुंज में बौद्ध धर्म' तथा 'प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षुओं की आत्मकथाएं' लिखीं।
मुख्य तथ्य:
यह गया, वाराणसी और नालंदा विश्वविद्यालय (जहाँ यह 10 वर्ष रहा) में रहा।
इसने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों के वैभव का विस्तृत वर्णन किया।
यह अपने साथ भारत से 400 संस्कृत ग्रंथों की प्रतियां चीन ले गया था।
इसने भारतीयों के खान-पान, स्वास्थ्य नियमों और भिक्षुओं के वस्त्र-नियमों का बारीक विवरण दिया है।
4. अल-बरूनी (Al-Biruni) — 1017–1030 ईस्वी
मूल देश: ख्वारिज्म (आधुनिक उज्बेकिस्तान)। वास्तविक नाम: अबु रेहान मुहम्मद इब्न अहमद।
भारत आगमन का उद्देश्य: महमूद गजनवी के आक्रमणों के दौरान बंदी बनाकर या उसके विद्वान के रूप में भारत आया।
समकालीन शासक: महमूद गजनवी।
भाषा ज्ञान: अरबी, फारसी, सीरियाई और भारत आकर इसने संस्कृत सीखी।
प्रमुख ग्रंथ: 'किताब-उल-हिंद' (Kitab-ul-Hind) या 'तहकीक-ए-हिंद' (अरबी भाषा में)।
मुख्य तथ्य:
यह पुराणों का अध्ययन करने वाला पहला मुसलमान था। उसने भगवद्गीता, उपनिषद और पतंजलि के योगसूत्र का भी अध्ययन किया।
उसने भारतीय समाज में 'अंत्यज' (Antyaja) वर्ग (चार वर्णों से बाहर की 8 अंत्यज श्रेणियां जैसे धोबी, जुलाहे, जादूगर आदि) का उल्लेख किया।
उसने भारत में सती प्रथा, बाल विवाह और जाति व्यवस्था की कठोरता का वर्णन किया।
उसने भारतीयों के ज्ञान की प्रशंसा की लेकिन उनके संकुचित दृष्टिकोण और अहंकार की आलोचना भी की कि "उनके जैसा कोई देश नहीं है, उनके जैसा कोई राजा नहीं है, और उनके विज्ञान जैसा कोई विज्ञान नहीं है।" [1]
📌 त्वरित पुनरीक्षण सारणी (Quick Revision Matrix)
🚩 1. फाह्यान (Fa-Hien) — (399–414 AD) | गुप्त काल
PYQ विशेष तथ्य (Exam Specific Facts):
विनिमय का माध्यम (Currency): इसने बताया कि आम जनता लेन-देन के लिए 'कौड़ियों' (Cowries) का प्रयोग करती थी।
चांडालों का वर्णन: यह पहला विदेशी यात्री था जिसने 'अस्पृश्यता' (Untouchability) का आँखों देखा हाल लिखा। इसने बताया कि 'चांडाल' गाँव के बाहर रहते थे और जब वे नगर में आते थे, तो लोगों को सावधान करने के लिए लकड़ी बजाते थे।
शाकाहार: इसने लिखा कि "मध्यदेश के लोग न तो किसी जीव की हत्या करते हैं, न ही मदिरा पीते हैं, और न ही प्याज-लहसुन खाते हैं" (सिर्फ चांडालों को छोड़कर)।
राजा का नाम गायब: इसने अपने पूरे यात्रा वृत्तांत में कहीं भी 'चंद्रगुप्त द्वितीय' का नाम नहीं लिया।
पाटलिपुत्र का महल: इसने अशोक के महल को "दैवीय निर्मित" (Built by Gods/Demons) कहा, क्योंकि पत्थर की नक्काशी इंसानों के बस की नहीं लगती थी।
अस्पताल: इसने पाटलिपुत्र में एक भव्य 'मुफ्त औषधालय' (Free Hospital) देखा जहाँ गरीबों का इलाज होता था।
लेखन: इसका यात्रा वृत्तांत 'फो-कुओ-की' (Fo-Kuo-Ki) है।
🚩 2. ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) — (629–645 AD) | हर्ष काल
शूद्रों की स्थिति: इसने शूद्रों को 'कृषक' (Agriculturists) कहा।
जाति प्रथा: फाह्यान के विपरीत, ह्वेनसांग ने जाति व्यवस्था को कठोर बताया। इसने मिश्रित जातियों का भी उल्लेख किया। [2]
सड़क सुरक्षा (Law & Order): इसने लिखा कि "सड़कें सुरक्षित नहीं थीं"। इसे खुद डाकुओं ने दो बार लूटा था। (तुलना: फाह्यान ने कहा था सड़कें सुरक्षित थीं)। [3]
न्याय व्यवस्था: इसने 'अग्नि परीक्षा', 'जल परीक्षा' और 'विष परीक्षा' (Ordeal by fire, water, poison) का उल्लेख किया।
सामंतवाद (Feudalism): यह पहला यात्री था जिसने बताया कि उच्च अधिकारियों को वेतन के बदले 'भूमि अनुदान' (Land Grants) दी जाती थी।
नालंदा का विवरण:
कुलपति: आचार्य शीलभद्र।
संरक्षण: इसने लिखा कि नालंदा को 100 गाँवों का राजस्व मिलता था।
छात्र: 10,000 भिक्षु और 1,500 शिक्षक थे।
पाटलिपुत्र: जब यह पहुँचा, तो पाटलिपुत्र एक "उजड़ा हुआ गाँव" बन चुका था और कन्नौज उत्तर भारत का प्रमुख शक्ति केंद्र बन गया था।
रेशम: इसने रेशमी वस्त्रों के लिए 'कौशेय' (Kausheya) शब्द का प्रयोग किया।
सती प्रथा: इसने सती प्रथा के अस्तित्व का संकेत दिया (हर्ष की माता यशोमती का सती होना)। [4]
🚩 3. इत्सिंग (I-Tsing) — (671–695 AD) | उत्तर-गुप्त काल
मार्ग (Route): यह समुद्री मार्ग (सुमात्रा/श्रीविजया) से आया और समुद्री मार्ग से ही लौटा। (यह अक्सर कथन कारण में आता है)।
नालंदा का समर्थन: ह्वेनसांग के बाद आया, इसलिए इसने बताया कि अब नालंदा को 200 गाँवों (ह्वेनसांग ने 100 कहा था) का दान प्राप्त है।
शिक्षा केंद्र: इसने नालंदा और वल्लभी (गुजरात) को उस समय के दो प्रमुख शिक्षा केंद्र बताया। (नोट: विक्रमशिला का वर्णन इसने नहीं किया क्योंकि वह बाद में बना)।
संस्कृत ग्रंथ: यह अपने साथ 400 संस्कृत पांडुलिपियां (Manuscripts) चीन ले गया।
अनुवाद: इसने मुख्य रूप से 'विनय पिटक' (भिक्षुओं के नियम) पर ध्यान केंद्रित किया और 'मूलसर्वास्तिवाद' निकाय के नियमों का अनुवाद किया।
🚩 4. अल-बरूनी (Al-Biruni) — (1017–1030 AD) | गजनवी काल
उपाधि: इसे 'भारतीय विद्या का जनक' (Father of Indology) कहा जाता है। [6]
'अंत्यज' (Antyaja): इसने शूद्रों से भी नीचे 8 सामाजिक श्रेणियों (धोबी, मोची, जादूगर, नाविक आदि) का वर्णन किया जिन्हें 'अंत्यज' कहा जाता था।
वैज्ञानिक आलोचना: इसने भारतीयों की "कूपमंडूकता" (Insular attitude) की आलोचना की। प्रसिद्ध कथन: "हिन्दुओं का विश्वास है कि उनके देश जैसा कोई देश नहीं, उनके राजा जैसा कोई राजा नहीं, और उनके विज्ञान जैसा कोई विज्ञान नहीं।"
अनुवाद कार्य:
संस्कृत से अरबी: पतंजलि का 'योगसूत्र', 'सांख्य' दर्शन, और वराहमिहिर की 'लघुजातकम'।
ग्रीक से संस्कृत: यूक्लिड (Euclid) की ज्यामिति का अनुवाद किया।
सती और विवाह: इसने बाल विवाह और विधवा विवाह निषेध का उल्लेख किया।
लेखन: इसकी पुस्तक 'तहकीक-ए-हिंद' (Kitab-ul-Hind) 80 अध्यायों में विभाजित है।
⚡ अन्य महत्वपूर्ण यात्री और PYQ Facts
परीक्षा में कालक्रम (Chronology) के लिए ये नाम:
🔥 Top 5 "Confusing" PYQ Comparisons
सड़क सुरक्षा: फाह्यान (सुरक्षित) vs ह्वेनसांग (असुरक्षित/लुटेरे)।
दास प्रथा: मेगस्थनीज (नहीं थी) vs अन्य (थी)।
नालंदा का राजस्व: ह्वेनसांग (100 गाँव) vs इत्सिंग (200 गाँव)।
शूद्र: ह्वेनसांग ने उन्हें 'कृषक' कहा। अल-बरूनी ने उन्हें चार वर्णों का हिस्सा माना लेकिन वेद पढ़ने से वंचित बताया।
नगरों की स्थिति: फाह्यान ने पाटलिपुत्र को भव्य बताया, जबकि ह्वेनसांग ने उसे खंडहर बताया।
🚩 1. अत्यंत दुर्लभ यात्री (Rare & High-Yield Travellers)
परीक्षा में अक्सर इन्हें कालक्रम (Chronology) में फंसाया जाता है।
(A) सुंग-युन (Sung Yun) — 518 ईस्वी
किसके साथ आया: ह्विसि (Hwui-Si) नामक भिक्षु के साथ।
उद्देश्य: बौद्ध रानियों द्वारा भेजा गया था। यह गांधार (उत्तर-पश्चिम भारत) आया।
महत्वपूर्ण तथ्य: इसने हूण राजा मिहिरकुल का उल्लेख किया और बताया कि हूण बौद्ध धर्म के कट्टर शत्रु थे।
(B) वांग-ह्वेन-त्से (Wang Hiuen Tse) — 648 ईस्वी (हर्ष की मृत्यु के तुरंत बाद)
अनोखी घटना (War in India): यह एकमात्र चीनी दूत था जिसने भारत में युद्ध लड़ा।
कहानी: जब यह हर्षवर्धन के दरबार में पहुंचा, तो हर्ष की मृत्यु हो चुकी थी और उसके मंत्री अर्जुन (Aruna) ने सिंहासन हड़प लिया था और चीनी दूत को लूट लिया।
बदला: वांग-ह्वेन-त्से नेपाल और तिब्बत भाग गया। वहां से उसने 7,000 घुड़सवारों की मदद ली (नेपाल और तिब्बत के राजाओं से) और असम के राजा भास्करवर्मन से 30,000 बैलों की रसद सहायता ली। उसने वापस आकर अर्जुन को हराया और उसे बंदी बनाकर चीन ले गया।
(C) धर्मस्वामिन (Dharmasvamin) — 1234 ईस्वी (नालंदा का अंत)
पहचान: तिब्बती भिक्षु।
महत्वपूर्ण तथ्य: यह तब आया जब बख्तियार खिलजी का आक्रमण हो चुका था।
आँखों देखा हाल: इसने नालंदा को "खंडहर और राख" के रूप में देखा। उसने लिखा कि वहां केवल 90 साल के एक बूढ़े आचार्य (राहुल श्रीभद्र) बचे थे और कुछ ही छात्र थे। इसने तुर्क सैनिकों (Turushka Soldiers) के हमले के डर का वर्णन किया है। [5]
🚩 2. विजयनगर साम्राज्य के यात्री (Vijayanagar Travellers) — Most Repeated Topic
🚩 3. मुगलकालीन यात्री (Mughal Era Travellers)
(A) रॉल्फ फिच (Ralph Fitch) — 1585 (अकबर)
पहला अंग्रेज: यह मर्चेंट ऑफ लंदन था।
प्रसिद्ध कथन: "आगरा और फतेहपुर सीकरी दोनों लंदन से बड़े और भव्य हैं।"
बाल विवाह: इसने लिखा कि यहाँ दूल्हा-दुल्हन को गोदी में उठाकर फेरे लगवाए जाते थे (बाल विवाह की चरम सीमा)।
(B) फ्रांस्वा बर्नियर (Francois Bernier) — 1658 (शाहजहाँ/औरंगजेब)
पेशा: चिकित्सक (Physician) - पहले दारा शिकोह का, फिर औरंगजेब का।
विवादित सिद्धांत: "भूमि का स्वामित्व" (Crown Ownership of Land)। उसने कहा कि "भारत में निजी भूमि स्वामित्व नहीं है, सारी जमीन राजा की है," जिससे किसान खेती में सुधार नहीं करते। (बाद में कार्ल मार्क्स ने इसी आधार पर 'एशियाई उत्पादन पद्धति' का सिद्धांत दिया)।
शहरों का वर्णन: इसने मुगल शहरों को "शिविर नगर" (Camp Towns) कहा, जो राजा के आते ही बसते थे और जाते ही उजड़ जाते थे।
कारखाने: इसने मुगलों के शाही कारखानों (Karkhanas) की खराब स्थिति का वर्णन किया जहाँ कारीगरों को कोड़े मारे जाते थे।
(C) जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर (Tavernier) — 1640-67 (शाहजहाँ/औरंगजेब)
पेशा: जौहरी (Jeweller/Diamond Merchant)।
मयूर सिंहासन: इसने तख्त-ए-ताउस (Peacock Throne) का सबसे विस्तृत वर्णन दिया और कोहिनूर (Koh-i-Noor) हीरे को देखा।
यात्रा: इसने भारत की 6 बार यात्रा की।
(D) निकोलाव मनुची (Manucci) — 1653-1708
पहचान: इतालवी साहसी। यह दारा शिकोह की सेना में तोपची (Gunner) था, बाद में डॉक्टर बना।
किताब: 'स्टोरियो डी मोगोर' (Storia do Mogor)। इसे "17वीं सदी के भारत का दर्पण" कहते हैं।
औरंगजेब: इसने औरंगजेब की कट्टरता और शिवाजी महाराज के साथ पुरंदर की संधि के समय जय सिंह की भूमिका के बारे में लिखा।
🚩 4.
(A) मेगस्थनीज की "7 जातियां" (The 7 Castes) [8]
मेगस्थनीज भारतीय वर्ण व्यवस्था (4 वर्ण) को समझ नहीं पाया और उसने कर्म (Profession) के आधार पर 7 जातियां बताईं: [8]
दार्शनिक (Philosophers): सबसे ऊपर (ब्राह्मण/श्रमण)।
कृषक (Husbandmen): संख्या में सबसे अधिक।
ग्वाले/चरवाहे (Herdsmen): जो नगर से बाहर रहते थे।
कारीगर/शिल्पी (Artisans): जो औजार बनाते थे।
सैनिक (Military): समाज का दूसरा सबसे बड़ा वर्ग।
निरीक्षक (Overseers): जो राजा को रिपोर्ट देते थे (गुप्तचर)।
सभासद (Councillors): मंत्री और अधिकारी।
(B) इब्न बतूता की "डाक व्यवस्था" (Postal System)
उसने लिखा कि भारत की गुप्तचर/डाक व्यवस्था अद्भुत थी। दिल्ली से सिंध की यात्रा 50 दिन की थी, लेकिन जासूसों की खबर 5 दिन में पहुँच जाती थी।
उलुक (Uluq): यह अश्व डाक (Horse Post) थी। हर 4 मील पर शाही घोड़े तैनात होते थे।
दावा (Dawa): यह पैदल डाक (Foot Post) थी। हर मील के एक-तिहाई हिस्से (1/3rd Mile) पर हरकारे (Runners) घंटी लेकर खड़े रहते थे। यह घोड़ों से भी तेज थी!
(C) सती प्रथा का ऐतिहासिक वर्णन (Timeline of Sati Descriptions)
यूनानी (Greek): पंजाब में कठ (Katha) जनजाति में सती का उल्लेख (326 BC)।
इब्न बतूता: इसने सती होने के लिए सुल्तान से अनुमति (Permit) लेने की अनिवार्यता बताई।
बर्नियर: इसने एक 12 साल की विधवा को जबरदस्ती आग में झोंके जाने का दिल दहला देने वाला आँखों देखा हाल लिखा।
📥 Final "Pro-Tip"
अगर प्रश्न में पूछा जाए:
"पान और नारियल" का वर्णन किसने किया? ➔ इब्न बतूता
"भारतीय इतिहास का जनक"? ➔ मेगस्थनीज
"भारतीय विद्या (Indology) का जनक"? ➔ अल-बरूनी
"मध्यकालीन यात्रियों का राजकुमार"? ➔ मार्को पोलो
"यात्रियों का राजकुमार"? ➔ ह्वेनसांग
किसने कहा "भारत में दास नहीं हैं"? ➔ मेगस्थनीज
किसने कहा "भारत में अकाल नहीं पड़ता"? ➔ मेगस्थनीज (ये दोनों बातें गलत थीं, पर एग्जाम में यही रटना है)।
🏛️ 1. प्राचीन काल के यात्री (Ancient Period Travellers)
(A) मेगस्थनीज (Megasthenes)
मूल पुस्तक: इंडिका (Indica) — (यह मूल रूप से नष्ट हो चुकी है, इसके अंश एरियन, स्ट्रैबो और प्लिनी के उद्धरणों में मिलते हैं)।
मूल भाषा: यूनानी (Greek)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: जे. डब्ल्यू. मैकक्रिंडल (J. W. McCrindle)। इन्होंने 1877 में इन सभी उद्धरणों को इकट्ठा करके 'Ancient India as Described by Megasthenes and Arrian' नाम से अंग्रेजी अनुवाद किया।
(B) फाह्यान (Fa-Hien)
मूल पुस्तक: फो-कुओ-की (Fo-Kuo-Ki) — (अर्थात: बौद्ध राज्यों का अभिलेख)।
मूल भाषा: चीनी (Chinese)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक:
सैमुअल बील (Samuel Beal) — 'Travels of Fah-Hian and Sung-Yun' (1869)।
जेम्स लेगे (James Legge) — 'A Record of Buddhistic Kingdoms' (1886) — यह अनुवाद परीक्षाओं में सबसे ज्यादा पूछा जाता है।
हिंदी अनुवादक: जगमोहन वर्मा (नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित)।
(C) ह्वेनसांग (Hiuen Tsang)
मूल पुस्तक: सी-यू-की (Si-Yu-Ki) — (अर्थात: पश्चिमी दुनिया का इतिहास)।
मूल भाषा: चीनी (Chinese)
ह्वेनसांग की जीवनी (Biography): इसे उसके मित्र ह्वली (Hwui-Li) ने लिखा था।
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक:
सैमुअल बील (Samuel Beal) — इन्होंने दो भागों में 'Si-Yu-Ki: Buddhist Records of the Western World' (1884) नाम से अनुवाद किया।
थॉमस वाटर्स (Thomas Watters) — 'On Yuan Chwang's Travels in India' (1904) — यह अधिक वैज्ञानिक अनुवाद माना जाता है।
(D) इत्सिंग (I-Tsing)
मूल पुस्तक: 'ए रिकॉर्ड ऑफ द बुद्धिस्ट रिलिजन एज प्रैक्टिस्ड इन इंडिया एंड द मलय आर्किपेलागो' (मूल चीनी नाम: नहाई जीगुई नेइफा झुआन)।
मूल भाषा: चीनी (Chinese)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: जे. ताकाकुसु (J. Takakusu) — इन्होंने 1896 में इसका ऑक्सफोर्ड से प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित करवाया।
🌙 2. पूर्व-मध्यकाल एवं अरब यात्री (Early Medieval & Arab Travellers)
(A) अल-बरूनी (Al-Biruni)
मूल पुस्तक: किताब-उल-हिंद (Kitab-ul-Hind) या तहकीक-ए-हिंद।
मूल भाषा: अरबी (Arabic)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: एडवर्ड सी. सचाउ (Edward C. Sachau) — इन्होंने 1888 में 'Alberuni's India' नाम से दो खंडों में इसका अनुवाद किया (UGC NET का सबसे पसंदीदा फैक्ट)।
प्रसिद्ध हिंदी अनुवादक: संत राम। इन्होंने सचाउ के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर इसका हिंदी रूपांतरण किया। [5]
(B) सुलेमान (Sulaiman Al-Tajir)
मूल पुस्तक: सिलसिलात-उत-तवारीख (Silsilat-at-Tawarikh)।
मूल भाषा: अरबी (Arabic)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: सर हेनरी इलियट और जॉन डॉवसन (Elliot and Dowson) — इन्होंने अपनी प्रसिद्ध श्रृंखला 'The History of India, as Told by Its Own Historians' के भाग-1 में इसका अनुवाद शामिल किया।
(C) अल-मसूदी (Al-Masudi)
मूल पुस्तक: मुरुज-उज-जहब (Muruj adh-Dhahab) — (अर्थात: सोने के चारागाह और जवाहरात की खानें)।
मूल भाषा: अरबी (Arabic)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: अलोइस स्प्रेंजर (Aloys Sprenger) (1841)।
🏰 3. सल्तनत एवं विजयनगर काल के यात्री (Sultanate & Vijayanagar Period)
(A) इब्न बतूता (Ibn Battuta)
मूल पुस्तक: रेहला (Tuhfat an-Nuzzar / Rihla) — (अर्थात: यात्रियों के लिए एक उपहार)।
मूल भाषा: अरबी (Arabic)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक:
एच. ए. आर. गिब (H. A. R. Gibb) — 'The Travels of Ibn Battuta' (Hakluyt Society)।
आगा महदी हुसैन (Agha Mahdi Husain) — इन्होंने विशेष रूप से भारत, मालदीव और सीलोन (श्रीलंका) से संबंधित भाग का अनुवाद किया (1953)।
(B) अब्दुर रज्जाक (Abdur Razzaq)
मूल पुस्तक: मतला-उस-सादेन व मजमा-उल-बहरेन (Matla-us-Sadain wa Majma-ul-Bahrain) — (अर्थात: दो शुभ नक्षत्रों का उदय और दो समुद्रों का मिलन)।
मूल भाषा: फारसी (Persian)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: आर. एच. मेजर (R. H. Major) — इन्होंने 1857 में 'India in the Fifteenth Century' नाम से इसका अनुवाद किया।
👑 4. मुगल काल के यात्री (Mughal Period Travellers)
(A) फ्रांसुआ बर्नियर (Francois Bernier)
मूल पुस्तक: ट्रैवल्स इन द मुगल एम्पायर (Travels in the Mogul Empire)।
मूल भाषा: फ्रांसीसी (French)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: आर्चीबाल्ड कांस्टेबल (Archibald Constable) — इन्होंने 1891 में इसका पहला और सबसे प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद किया, जिसे बाद में वी. ए. स्मिथ (V. A. Smith) ने संशोधित किया।
(B) निकोलाव मनुची (Niccolao Manucci)
मूल पुस्तक: स्टोरियो डी मोगोर (Storia do Mogor) — (अर्थात: मुगल भारत की कहानी)।
मूल भाषा: यह मूल रूप से इतालवी, पुर्तगाली और फ्रांसीसी भाषाओं के मिश्रण में लिखी गई थी।
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: विलियम इरविन (William Irvine) — इन्होंने 1907-1908 में बंगाल एशियाटिक सोसाइटी के लिए चार खंडों में इसका विस्तृत और प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद किया।
(C) जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर (Jean-Baptiste Tavernier)
मूल पुस्तक: लेस सिक्स वोयाजेस (Les Six Voyages de J. B. Tavernier) — (अर्थात: टैवर्नियर की छह यात्राएं)।
मूल भाषा: फ्रांसीसी (French)
प्रसिद्ध अंग्रेजी अनुवादक: वी. बैल (V. Ball) — इन्होंने 1889 में 'Travels in India by Jean-Baptiste Tavernier' नाम से दो खंडों में इसका अनुवाद किया।
💡 परीक्षा के लिए विशेष
मैकक्रिंडल ➔ हमेशा यूनानी/मौर्य काल (मेगस्थनीज) से जुड़ेंगे।
सैमुअल बील ➔ हमेशा चीनी यात्रियों (फाह्यान, सुंग-युन, ह्वेनसांग) से जुड़ेंगे।
सचाउ ➔ हमेशा अल-बरूनी (किताब-उल-हिंद) से जुड़ेंगे।
विलियम इरविन ➔ हमेशा मनुची (स्टोरियो डी मोगोर) से जुड़ेंगे।
आर्चीबाल्ड कांस्टेबल ➔ हमेशा बर्नियर (ट्रैवल्स इन द मुगल एम्पायर) से जुड़ेंगे
