1857 के विद्रोह से पहले के प्रमुख आंदोलन
संन्यासी विद्रोह
1763–1800क्षेत्र: बंगाल और बिहार
कारण: आर्थिक संकट, अकाल और धार्मिक प्रतिबंधों के खिलाफ संन्यासियों व फकीरों का आंदोलन।
चुआड़ विद्रोह
1766–1816क्षेत्र: मिदनापुर (बंगाल)
कारण: मिदनापुर और जंगल महाल के चुआड़ जनजातियों द्वारा बढ़ाए गए भू-राजस्व और अकाल के विरोध में।
पहाड़िया विद्रोह
1778क्षेत्र: राजमहल की पहाड़ियाँ (झारखंड)
कारण: राजमहल पहाड़ियों के राजा जगन्नाथ द्वारा ब्रिटिश विस्तार और उनके जंगलों में दखल के खिलाफ।
रंगपुर का विद्रोह
1783क्षेत्र: बंगाल
कारण: ठेकेदारों और अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध किसानों का आंदोलन।
विजयनगरम के राजा का विद्रोह
1794क्षेत्र: उत्तरी सरकार (आंध्र प्रदेश)
कारण: अंग्रेजों द्वारा राजा को सेना भंग करने और भारी कर देने के आदेश के खिलाफ विद्रोह।
पॉलीगारों का विद्रोह
1795–1805क्षेत्र: तमिलनाडु (कर्नाटक क्षेत्र)
कारण: वीरपांड्या कट्टाबोम्मन और मरुथु भाइयों द्वारा अंग्रेजों की प्रत्यक्ष कर वसूली के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध।
रामपा विद्रोह
1803, 1840, 1845क्षेत्र: तटीय आंध्र प्रदेश
कारण: मुत्तादारों (जमींदारों) और ब्रिटिश सरकार के शोषण के खिलाफ प्रारंभिक विद्रोह।
वेल्लोर सिपाही विद्रोह
1806क्षेत्र: वेल्लोर (तमिलनाडु)
कारण: भारतीय सिपाहियों के धार्मिक प्रतीकों और पोशाक पर ब्रिटिश पाबंदियों के खिलाफ पहला बड़ा सैन्य-नागरिक विद्रोह।
वेल्लू थम्पी का विद्रोह
1808–1809क्षेत्र: त्रावणकोर (केरल)
कारण: त्रावणकोर के दीवान वेल्लू थम्पी द्वारा ब्रिटिश सहायक संधि (Subsidiary Alliance) और भारी वित्तीय बोझ के खिलाफ विद्रोह।
कच्छ का विद्रोह
1816–1832क्षेत्र: गुजरात
कारण: अंग्रेजों द्वारा स्थानीय शासक राव भारमल को हटाकर अपनी पसंद का राजा बिठाने के विरोध में विद्रोह।
पाईका विद्रोह
1817क्षेत्र: ओडिशा
कारण: बक्शी जगबंधु के नेतृत्व में ब्रिटिश कर नीतियों और भूमि अधिकारों के हनन के खिलाफ सशस्त्र जन-विद्रोह।
भील विद्रोह
1817–1819क्षेत्र: पश्चिमी भारत
कारण: ब्रिटिश शासन के कारण जीवनशैली बाधित होने पर भील आदिवासियों का संघर्ष।
पागलपंथी आंदोलन
1825–1835क्षेत्र: मयमनसिंह जिला (बंगाल)
कारण: करम शाह और टीपू द्वारा जमींदारों के अत्याचार के खिलाफ अर्द्ध-धार्मिक किसान व आदिवासी विद्रोह।
अहोम विद्रोह
1828क्षेत्र: असम
कारण: गोमधर कोंवर के नेतृत्व में। बर्मा युद्ध के बाद अंग्रेजों द्वारा असम से वापस न जाने के वादे से मुकरने के कारण।
खासी विद्रोह
1829–1833क्षेत्र: मेघालय
कारण: तीरत सिंह के नेतृत्व में। अंग्रेज खासी पहाड़ियों के बीच से जबरन सड़क निर्माण और गैर-आदिवासियों को बसा रहे थे।
सिंघपो विद्रोह
1830-1840 के दशकक्षेत्र: असम
कारण: ब्रिटिश नियंत्रण के खिलाफ सिंघपो आदिवासियों का सशस्त्र संघर्ष।
कोल विद्रोह
1831–1832क्षेत्र: छोटा नागपुर क्षेत्र
कारण: भूमि पर बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और राजस्व नीतियों के खिलाफ।
नारकेलबेरिया / टिटू मीर का विद्रोह
1831क्षेत्र: बंगाल
कारण: मीर निथार अली (टिटू मीर) के नेतृत्व में हिंदू जमींदारों और नील बागान मालिकों के विरुद्ध मुस्लिम किसानों का संघर्ष।
मोपला (मोपिला) विद्रोह (प्रारंभिक चरण)
1836–1854क्षेत्र: मालाबार (केरल)
कारण: मुस्लिम काश्तकारों (मोपला) द्वारा हिंदू जमींदारों (जेनमी) और ब्रिटिश कर नीतियों के खिलाफ बार-बार किए गए हिंसक विद्रोह।
खोंड विद्रोह
1837–1856क्षेत्र: ओडिशा
कारण: चक्र बिसोई के नेतृत्व में। अंग्रेजों द्वारा उनकी पारंपरिक 'मरियाह' (मानव बलि) प्रथा पर रोक लगाने और नए कर लगाने के कारण।
फराजी आंदोलन
1838–1857क्षेत्र: बंगाल
कारण: हाजी शरीअतुल्लाह और उनके बेटे दादू मियां के नेतृत्व में। यह जमींदारों के अत्याचार के खिलाफ किसानों का संगठित आंदोलन था।
संथाल हूल
1855–1856क्षेत्र: झारखंड / बिहार
कारण: सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में महाजनों और ब्रिटिश राजस्व व्यवस्था के विरुद्ध ऐतिहासिक आदिवासी विद्रोह।
