प्रश्न–1 : बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए
(क) राजा के मन में उठने वाले तीन सवाल क्या थे?
- किसी कार्य को करने का सही समय कौन-सा होता है?
- किसकी बात सुननी चाहिए और किसे टालना चाहिए?
- सबसे आवश्यक कार्य कौन-सा है?
(ख) राजा ने साधु से मिलने के लिए क्या किया?
उत्तर— राजा ने साधु से मिलने के लिए अपने राजसी वस्त्र उतारकर साधारण कपड़े पहने।
(ग) राजा का शत्रु उनका मित्र कैसे बन गया?
उत्तर— राजा ने घायल व्यक्ति का इलाज किया और वह ठीक हो गया। वह व्यक्ति राजा के कार्यों से खुश होकर उनका मित्र बन गया।
(घ) घायल व्यक्ति ने होश आने पर अपने बारे में राजा से क्या बताया?
उत्तर— घायल व्यक्ति ने राजा से बताया कि वह उन्हें मारने के लिए आ रहा था। राजा के अंगरक्षकों ने उसे देख लिया और किसी तरह वह जान बचाकर आया था।
(ङ) राजा को अपने प्रश्नों के क्रमशः क्या-क्या उत्तर मिले?
- जब वह क्यारियाँ तैयार कर रहे थे, वही सबसे सही समय था।
- क्यारियाँ तैयार करते समय सबसे महत्त्व का आदमी साधु थे और घायल व्यक्ति का इलाज करते समय सबसे महत्त्व का आदमी घायल व्यक्ति था। उनकी बात सुनना अधिक आवश्यक था।
- घायल व्यक्ति की मरहम-पट्टी करना सबसे आवश्यक कार्य था।
प्रश्न–2 : सोच–विचार : बताइए—
(क) राजा की जगह तुम होते तो साधु की कुटिया पर पहुँचकर क्या करते?
उत्तर— मैं साधु की यथा-संभव सहायता करता तथा उनके सभी कार्यों में हाथ बँटाता।
घायल व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करते?
उत्तर— मैं भी राजा की तरह घायल व्यक्ति की मरहम-पट्टी करता, उसकी सेवा करता तथा उसके स्वस्थ होने तक उसकी देखभाल करता।
(ख) आपके लिए सबसे ज़रूरी काम क्या है? इसे आप कैसे पूरा करेंगे?
उत्तर— मेरे लिए सबसे ज़रूरी काम पढ़ाई करना है। इसे पूरा करने के लिए मैं नियमित अध्ययन करूँगा, समय का सदुपयोग करूँगा तथा अपने गुरुजनों के साथ-साथ माता-पिता का मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त करूँगा।