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प्रेस की आजादी का इतिहास: UPPCS & UPSC Complete Modern History Notes

प्रेस की आजादी का इतिहास: UPPCS & UPSC Complete Modern History Notes
प्रेस की आजादी के लिए संघर्ष (1780-1947) | UPSC & PCS Notes

Chapter 7: प्रेस की आजादी के लिए संघर्ष (Freedom of Press Struggle)

⏱️ Estimated Reading Time: 10 min | 🗓️ Published: Placeholder Date | ✍️ Author: Educator

1. ब्रिटिश काल में प्रेस पर प्रतिबंध और संघर्ष (1780 - 1947)

  • 1780: जेम्स ऑगस्टस हिकी ने भारत का पहला समाचार पत्र 'बंगाल गजट' शुरू किया, जिसे सरकार की आलोचना के कारण 1782 में जब्त कर लिया गया।
  • 1799: सेंसरशिप ऑफ प्रेस एक्ट (लॉर्ड वेलेजली) द्वारा फ्रांसीसी आक्रमण के डर से सभी समाचार पत्रों पर युद्धकालीन सेंसरशिप लागू की गई।
  • 1823: लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट (जॉन एडम्स) द्वारा बिना लाइसेंस के प्रेस चलाने पर जुर्माना लगाया गया, जिसके तहत राजा राममोहन राय की 'मिरात-उल-अखबार' को बंद करना पड़ा।
  • 1835: लिबरेशन ऑफ इंडियन प्रेस एक्ट (चार्ल्स मेटकाफ) ने 1823 के कड़े नियमों को रद्द किया, जिसके कारण मेटकाफ को "भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता" कहा जाता है।
  • 1867: रजिस्ट्रेशन एक्ट (पंजीकरण अधिनियम) ने मेटकाफ के अधिनियम की जगह ली, जिसका उद्देश्य प्रेस को प्रतिबंधित करना नहीं बल्कि नियमित (Regulate) करना था।
  • 1878: वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (लॉर्ड लिटन) का उद्देश्य स्थानीय भाषा के समाचार पत्रों को दबाना था। इससे बचने के लिए 'अमृत बाजार पत्रिका' रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी में बदल गई।
  • 1881: बाल गंगाधर तिलक ने प्रेस की आजादी के लिए लड़ते हुए पत्रकार के रूप में जेल जाने वाले पहले भारतीय बने (उन्होंने 'केसरी' और 'मराठा' के जरिए संघर्ष किया)।
  • 1882: लॉर्ड रिपन ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878) को पूरी तरह से निरस्त (Repeal) कर दिया।
  • 1908: न्यूजपेपर (इंसाइटमेंट टू ऑफेंसेस) एक्ट के तहत क्रांतिकारी गतिविधियों के खिलाफ लिखने वाले प्रेसों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार सरकार को मिला।
  • 1910: इंडियन प्रेस एक्ट ने 1908 के अधिनियम के नियमों को और कड़ा किया तथा स्थानीय सरकारों को भारी सुरक्षा जमानत (Security Deposit) मांगने का अधिकार दिया।
  • 1931: इंडियन प्रेस (इमरजेंसी पावर्स) एक्ट सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) के प्रचार को रोकने के लिए लाया गया था।

2. स्वतंत्रता के बाद प्रेस की आजादी का विकास (1947 - वर्तमान)

  • 1950: भारतीय संविधान का प्रवर्तन हुआ, जिसमें अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत 'वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' दी गई, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है।
  • 1951: प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 19(2) में "सार्वजनिक व्यवस्था" (Public Order) जैसे शब्द जोड़कर प्रेस पर 'उचित प्रतिबंध' (Reasonable Restrictions) लगाए गए।
  • 1951: प्रेस (आपत्तिजनक सामग्री) अधिनियम पारित किया गया, जिसने सरकार को आपत्तिजनक सामग्री छापने पर प्रेस और सुरक्षा राशि जब्त करने का अधिकार दिया (यह 1956 तक प्रभावी रहा)।
  • 1952: प्रथम प्रेस आयोग का गठन जीएस राजाध्यक्ष की अध्यक्षता में हुआ, जिसने 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' की स्थापना की सिफारिश की।
  • 1956: संसदीय कार्यवाही (संरक्षण) अधिनियम (फिरोज गांधी अधिनियम) द्वारा संसद की कार्यवाही को बिना किसी कानूनी डर के रिपोर्ट करने की आजादी प्रेस को मिली।
  • 1966: प्रथम प्रेस परिषद (Press Council of India - PCI) की स्थापना की गई, ताकि प्रेस के मानकों को बनाए रखा जा सके।
  • 1975 - 1977: आपातकाल (Emergency) के दौरान सेंसरशिप लागू की गई, प्रेस काउंसिल को भंग कर दिया गया और फिरोज गांधी अधिनियम को रद्द कर दिया गया।
  • 1977: द्वितीय प्रेस आयोग का गठन पी.के. गोस्वामी की अध्यक्षता में हुआ (बाद में ए.एन. ग्रोवर इसके अध्यक्ष बने)।
  • 1978: प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत आपातकाल के बाद 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' को पुनर्जीवित (Re-established) किया गया।

🌟 समाचार पत्र और संपादक

अमृत बाजार पत्रिका

शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष। (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी में परिवर्तित)।

मिरात-उल-अखबार और संवाद कौमुदी

राजा राममोहन राय (भारतीय पत्रकारिता के अग्रदूत)।

केसरी (मराठी) और मराठा (अंग्रेजी)

बाल गंगाधर तिलक।

द हिंदू

जी. सुब्रमण्यम अय्यर।

सोम प्रकाश

ईश्वर चंद्र विद्यासागर (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट विशेष रूप से इसी अखबार को प्रतिबंधित करने के लिए लाया गया था)।

मूकनायक और बहिष्कृत भारत

डॉ. बी.आर. अंबेडकर।

यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन

महात्मा गांधी।

उदन्त मार्तण्ड

जुगल किशोर शुक्ल (भारत का पहला हिंदी समाचार पत्र - 1826, कोलकाता)।

📜 ब्रिटिश अधिनियमों से जुड़े महत्वपूर्ण फैक्ट्स

प्रेस का मुक्तिदाता (Liberator of Indian Press)

लॉर्ड चार्ल्स मेटकाफ (1835 के अधिनियम द्वारा प्रतिबंध हटाए)।

गैगिंग एक्ट (Gagging Act / मुंह बंद करने वाला कानून)

लॉर्ड लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878) को कहा जाता है।

लॉर्ड वेलेजली (1799)

भारत में पहली बार समाचार पत्रों पर पूर्ण सेंसरशिप (Censorship) लागू करने वाला गवर्नर-जनरल।

लाइसेंसिंग नियम 1823

जॉन एडम्स द्वारा लागू किया गया, जिसके कारण राजा राममोहन राय का 'मिरात-उल-अखबार' बंद हुआ।

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को रद्द किसने किया?

लॉर्ड रिपन ने 1882 में इसे पूरी तरह समाप्त किया।

🏛️ संवैधानिक और स्वतंत्रता के बाद के फैक्ट्स

प्रेस की स्वतंत्रता का मूल अधिकार

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) [वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता] में अंतर्निहित है। संविधान में 'प्रेस' शब्द का अलग से उल्लेख नहीं है।

प्रथम संविधान संशोधन (1951)

इसके द्वारा अनुच्छेद 19(2) में संशोधन कर प्रेस पर "सार्वजनिक व्यवस्था, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और अपराध के लिए उकसाना" के आधार पर तार्किक प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए गए।

संसदीय कार्यवाही की रिपोर्टिंग

फिरोज गांधी अधिनियम (1956) ने प्रेस को संसद की कार्यवाही को स्वतंत्र रूप से प्रकाशित करने का अधिकार दिया (अनुच्छेद 361A)।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)

इसकी स्थापना 1966 में पहले प्रेस आयोग की सिफारिश पर की गई थी। यह एक अर्ध-न्यायिक (Semi-judicial) वैधानिक संस्था है।

1. ब्रिटिश काल के छूटे हुए महत्वपूर्ण मील के पत्थर (1799 - 1942)

  • 1799: सेंसरशिप लागू करने की शुरुआत – लॉर्ड वेलेजली ने 'सेंसरशिप ऑफ प्रेस एक्ट' पारित किया। इसके तहत संपादक, मुद्रक (Printer) और मालिक का नाम अखबार पर छापना अनिवार्य कर दिया गया।
  • 1818: 'समाचार दर्पण' का प्रकाशन – मार्शमैन द्वारा बंगाली भाषा में पहला साप्ताहिक समाचार पत्र शुरू किया गया।
  • 1821: 'संवाद कौमुदी' – राजा राममोहन राय ने बंगाली भाषा में इस साप्ताहिक पत्र की शुरुआत की, जिसने सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई।
  • 1822: 'मिरात-उल-अखबार' और 'बॉम्बे समाचार' – राजा राममोहन राय ने पहला फारसी अखबार 'मिरात-उल-अखबार' निकाला। इसी साल फर्दुनजी मरज़बान ने भारत का पहला भाषाई दैनिक 'बॉम्बे समाचार' (गुजराती) शुरू किया।
  • 1826: 'उदन्त मार्तण्ड' – जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता से पहला हिंदी समाचार पत्र प्रकाशित किया। (UGC NET/State PCS का पेटेंट प्रश्न)।
  • 1858: 'सोम प्रकाश' – ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने इस बंगाली साप्ताहिक की शुरुआत की। यह पहला ऐसा राजनीतिक समाचार पत्र था जिसने नील आंदोलन के किसानों का खुलकर समर्थन किया।
  • 1861: 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' – रॉबर्ट नाइट ने 'बॉम्बे टाइम्स' का नाम बदलकर 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' किया।
  • 1868: 'अमृत बाजार पत्रिका' – शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष द्वारा बंगाली में शुरुआत।
  • 1878: रातों-रात भाषा परिवर्तन – लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (Gagging Act) के डर से 'अमृत बाजार पत्रिका' रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी अखबार में बदल गई।
  • 1878: 'द हिंदू' – जी. सुब्रमण्यम अय्यर, वीरराघवाचारी और सुब्बा राव पंडित द्वारा मद्रास से साप्ताहिक के रूप में शुरुआत (1889 में यह दैनिक बना)।
  • 1881: 'केसरी' और 'मराठा' – बाल गंगाधर तिलक द्वारा क्रमशः मराठी और अंग्रेजी में प्रकाशन शुरू।
  • 1913: 'गदर' अखबार – लाला हरदयाल और गदर पार्टी द्वारा सैन फ्रांसिस्को से बहुभाषी (उर्दू, गुरमुखी आदि) अखबार की शुरुआत, जिसके पहले पन्ने पर लिखा होता था "अंग्रेजी राज का दुश्मन"।
  • 1919: 'इंडिपेंडेंट' – मोतीलाल नेहरू द्वारा भारत के लिए स्वशासन की मांग को उठाने के लिए शुरू किया गया अखबार।
  • 1920: 'मूकनायक' – डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा दलितों और वंचितों की आवाज उठाने के लिए शुरू किया गया मराठी पाक्षिक (Fortnightly)।
  • 1924: 'हिंदुस्तान टाइम्स' – के.एम. पणिक्कर द्वारा अकाली आंदोलन के हिस्से के रूप में स्थापित।
  • 1930: 'हरिजन' – महात्मा गांधी द्वारा यरवदा जेल से 'हरिजन' (अंग्रेजी), 'हरिजन बंधु' (गुजराती) और 'हरिजन सेवक' (हिंदी) की शुरुआत की गई।
  • 1938: 'नेशनल हेराल्ड' – जवाहरलाल नेहरू द्वारा लखनऊ से शुरू किया गया अंग्रेजी अखबार।
  • 1942: 'क्विट इंडिया' सेंसरशिप – भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार ने प्रेस पर कड़ी प्री-सेंसरशिप लगा दी, जिसके विरोध में गांधी जी के 'हरिजन' सहित कई अखबारों ने प्रकाशन बंद कर दिया।

2. स्वतंत्रता के बाद के छूटे हुए मुख्य पड़ाव (1950 - 1988)

  • 1950: रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य केस – सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जिसमें कहा गया कि प्रेस की स्वतंत्रता 'वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (अनुच्छेद 19(1)(a)) का ही हिस्सा है।
  • 1951: प्रथम संविधान संशोधन – नेहरू सरकार द्वारा अनुच्छेद 19(2) जोड़ा गया ताकि प्रेस द्वारा दिए जाने वाले भड़काऊ भाषणों पर तार्किक प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाया जा सके।
  • 1952: प्रथम प्रेस आयोग का गठन – जी.एस. राजाध्यक्ष की अध्यक्षता में। इसने अखिल भारतीय प्रेस परिषद और 'रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया' (RNI) की स्थापना की सिफारिश की।
  • 1954: वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट – श्रम सुधारों और पत्रकारों के काम के घंटे, वेतन और सुरक्षा को विनियमित करने के लिए कानून पारित।
  • 1956: फिरोज गांधी अधिनियम – 'संसदीय कार्यवाही (संरक्षण) अधिनियम' पारित हुआ, जिसने प्रेस को संसद के भीतर की बहसों को बिना मानहानि के डर के छापने की आजादी दी।
  • 1975: आंतरिक आपातकाल (Emergency) – इंदिरा गांधी सरकार द्वारा पूर्ण प्रेस सेंसरशिप लागू। मुख्यमंत्रियों और जिला मजिस्ट्रेटों को अखबारों की कॉपियां पहले जांचने का अधिकार दिया गया। 'इंडियन एक्सप्रेस' और 'स्टेट्समैन' ने इसके विरोध में संपादकीय (Editorial) पेज खाली छोड़ दिया था।
  • 1978: एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स बनाम भारत संघ केस – सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रेस पर भारी कर (Tax) लगाना भी प्रेस की आजादी का उल्लंघन है।
  • 1988: बिहार और जम्मू-कश्मीर मानहानि विधेयक (Defamation Bill) विवाद – सरकारों ने प्रेस को दबाने के लिए कड़े मानहानि कानून लाने की कोशिश की, लेकिन पत्रकारों के देशव्यापी भारी विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा।

भारत के प्रमुख ऐतिहासिक समाचार पत्रों, उनके संस्थापकों/संपादकों

वर्ष (Year) समाचार पत्र (Newspaper) संस्थापक / संपादक (Founder/Editor) परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण PYQ फैक्ट्स (Crucial PYQ Facts)
1780 बंगाल गजट (Bengal Gazette) जेम्स ऑगस्टस हिकी (J.A. Hickey)
  • भारत का पहला समाचार पत्र (कलकत्ता से प्रकाशित)।
  • इसे 'द कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर' भी कहा जाता था।
  • सरकार की आलोचना के कारण 1782 में प्रेस जब्त हुआ।
1818 समाचार दर्पण (Samachar Darpan) विलियम केरी और मार्शमैन (Serampore Missionaries)
  • प्रथम भाषाई (बंगाली) साप्ताहिक समाचार पत्र।
1821 संवाद कौमुदी (Sambad Kaumudi) राजा राममोहन राय (Raja Rammohan Roy)
  • बंगाली साप्ताहिक पत्र।
  • इसके माध्यम से सती प्रथा के उन्मूलन के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया गया।
1822 मिरात-उल-अखबार (Mirat-ul-Akbar) राजा राममोहन राय
  • भारत का पहला फारसी (Persian) समाचार पत्र।
  • जॉन एडम्स के 'लाइसेंसिंग नियम 1823' के विरोध में इसे बंद करना पड़ा।
1822 बॉम्बे समाचार (Bombay Samachar) फर्दुनजी मरज़बान (Fardunjee Marzban)
  • भारत का पहला भाषाई दैनिक (Gujarati Daily) अखबार।
1826 उदन्त मार्तण्ड (Udant Martand) जुगल किशोर शुक्ल (Jugal Kishore Shukla)
  • भारत का पहला हिंदी समाचार पत्र (30 मई 1826, कलकत्ता)।
  • इसीलिए हर साल 30 मई को 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।
1853 हिंदू पैट्रियाट (Hindoo Patriot) गिरीश चंद्र घोष / हरिश्चंद्र मुखर्जी
  • नील विद्रोह (Indigo Revolt, 1859) के किसानों का खुलकर समर्थन करने और उनकी दुर्दशा छापने वाला मुख्य अखबार।
1858 सोम प्रकाश (Som Prakash) ईश्वर चंद्र विद्यासागर (I.C. Vidyasagar)
  • प्रथम बंगाली राजनीतिक अखबार।
  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878) मुख्य रूप से इसी अखबार को प्रतिबंधित करने के लिए लाया गया था।
1862 इंडियन मिरर (Indian Mirror) देवेन्द्रनाथ टैगोर और मनमोहन घोष
  • कलकत्ता से प्रकाशित होने वाला दैनिक अंग्रेजी अखबार।
1868 अमृत बाजार पत्रिका (Amrita Bazar Patrika) शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष
  • UPSC/NET का पेटेंट प्रश्न: लॉर्ड लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878) के कानूनी फंदे से बचने के लिए यह अखबार रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी में बदल गया था।
1878 द हिंदू (The Hindu) जी. सुब्रमण्यम अय्यर और वीरराघवाचारी
  • मद्रास (चेन्नई) से शुरू हुआ। अय्यर ने इसके साथ ही तमिल में 'स्वदेशमित्रन' भी शुरू किया था।
1881 केसरी और मराठा (Kesari & Mahratta) बाल गंगाधर तिलक (B.G. Tilak)
  • 'केसरी' मराठी भाषा में और 'मराठा' अंग्रेजी भाषा में था।
  • तिलक अपनी बेबाक पत्रकारिता के कारण ब्रिटिश काल में जेल जाने वाले पहले पत्रकार बने।
1881 सुधारक (Sudharak) गोपाल कृष्ण गोखले (G.K. Gokhale)
  • गोखले ने समाज सुधार और चेतना जगाने के लिए इस पत्र का संपादन किया।
1910 कॉमरेड (Comrade) मोहम्मद अली जौहर (Mohammad Ali)
  • अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार, जिसने मुस्लिम बुद्धिजीवियों को प्रभावित किया। (साथ ही उर्दू में 'हमदर्द' निकाला)।
1912 अल-हिलाल (Al-Hilal) अबुल कलाम आजाद (Abul Kalam Azad)
  • उर्दू साप्ताहिक पत्र, जिसने ब्रिटिश विरोधी भावनाओं और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रचार किया। प्रेस एक्ट के तहत 1914 में प्रतिबंधित हुआ।
1913 गदर (Ghadar) लाला हरदयाल (Ghadar Party)
  • सैन फ्रांसिस्को (USA) से प्रकाशित। पहले पन्ने पर टैगलाइन होती थी: "अंग्रेजी राज का दुश्मन"।
1919 इंडिपेंडेंट (Independent) मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru)
  • इलाहाबाद से शुरू। इसका उद्देश्य नरमपंथियों के अखबार 'द पायनियर' के प्रभाव को कम करना और स्वशासन की मांग तेज करना था।
1920 मूकनायक (Mooknayak) डॉ. बी.आर. अंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar)
  • दलितों और अछूतों की आवाज बुलंद करने के लिए बाबासाहेब द्वारा शुरू किया गया मराठी पाक्षिक (Fortnightly) पत्र। (इसके बाद 1927 में 'बहिष्कृत भारत' निकाला)।
1924 हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के.एम. पणिक्कर (K.M. Panikkar)
  • अकाली आंदोलन के समर्थन में शुरू हुआ अंग्रेजी दैनिक। बाद में मदन मोहन मालवीय ने इसे खरीद लिया।
1919-33 यंग इंडिया, नवजीवन, हरिजन महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)
  • 1919: 'यंग इंडिया' (अंग्रेजी) और 'नवजीवन' (गुजराती)।
  • 1933: यरवदा जेल से 'हरिजन' (अंग्रेजी), 'हरिजन सेवक' (हिंदी) और 'हरिजन बंधु' (गुजराती) की शुरुआत।
1938 नेशनल हेराल्ड (National Herald) जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)
  • लखनऊ से शुरू किया गया अंग्रेजी समाचार पत्र, जो राष्ट्रीय आंदोलन के विचारों का प्रमुख मंच बना।

💡 परीक्षा के लिए क्विक रिवीजन 'ट्रेंड्स' (Exam Trends Check):

  • भाषा का खेल (Language Match): परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि मराठा किस भाषा में था (उत्तर: अंग्रेजी) और केसरी किस भाषा में (उत्तर: मराठी)।
  • स्थान आधारित (Location): गदर भारत से बाहर (सैन फ्रांसिस्को) से छपता था, जबकि उदन्त मार्तण्ड हिंदी का होने के बावजूद कलकत्ता से छपता था।
  • गवर्नर जनरल और प्रेस संबंध: वेलेजली = सेंसरशिप की शुरुआत (1799), मेटकाफ = मुक्तिदाता (1835), लिटन = गैगिंग एक्ट/प्रतिबंध (1878), रिपन = प्रतिबंधों की समाप्ति (1882)।
  • Brij Bhushan v. State of Delhi (1950): यह freedom of press के शुरुआती landmark cases में से एक है; इसमें pre-censorship को press liberty पर restriction माना गया।
  • Romesh Thappar v. State of Madras (1950): press freedom को Article 19(1)(a) के दायरे में early recognition यहीं से मिली;
  • Sakal Papers v. Union of India (1962): newspaper के pages, price और advertisement space को regulate करने वाला law unconstitutional ठहरा;
  • Bennett Coleman & Co. v. Union of India (1972): newsprint/page control और circulation restriction के खिलाफ very important press-freedom case है।
  • Indian Express Newspapers v. Union of India (1985): Supreme Court ने फिर से press freedom को Article 19(1)(a) का integral part माना
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