सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण हस्तलिखित नोट्स - UPTET, CTET, Super TET 2026
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UPTET, CTET, Super TET और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ी अन्य सभी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सम्पूर्ण हिन्दी व्याकरण के हस्तलिखित नोट्स।
1. वर्ण विचार
वह छोटी से छोटी ध्वनि जिसके टुकड़े न हो सके वर्ण कहलाती है। शब्द निर्माण की लघुतम ईकाई ध्वनि या वर्ण है। वर्ण के भेद: 1. स्वर 2. व्यंजन। हिन्दी वणमाला में 11 स्वर और 33 व्यंजन है。
स्वर
वे ध्वनियाँ जिनके उच्चारण में वायु बिना किसी अवरोध के बाहर निकलती है, स्वर कहलाते है।
- ह्रस्व स्वर: इनके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है। जैसे अ, इ, उ, ऋ।
- दीर्घ स्वर: इनके उच्चारण में ह्रस्व स्वर की अपेक्षा दुगुना समय लगता है। जैसे आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
- प्लुत स्वर: हिन्दी में इसका प्रयोग नहीं होता जैसे ओउम्।
व्यंजन
जो वर्ण स्वरों की सहायता से बोले जाते है। व्यंजन कहलाते है।
- स्पर्श: क्, च्, ट्, त्, प्, वर्गो की प्रथम चार ध्वनियाँ।
- संघर्षी: वायु घर्षण करके निकलती है। जैसे श्, ष्, स्, ह्, ज़्, फ़्।
- स्पर्श संघर्षी: जैसे - च्, छ्, ज्, झ्।
- नासिक्य: जैसे- ड्, ञ्, ण्, न्, म्।
- पाश्विक: जैसे - ल्।
- लुण्ठित: जैसे - र्।
- अर्द्ध स्वर: जैसे - य्, व्।
2. शब्द भेद
एक या अधिक वर्णों के मेल से बनी सार्थक ध्वनि को शब्द कहा जाता है。
- तत्सम: जो शब्द संस्कृत से हिन्दी में ज्यो के त्यों ले लिए गए है (जैसे अग्नि, पृथ्वी)।
- तद्भव: तत्सम के वे शब्द जो कुछ बिगड़ कर हिन्दी में प्रचलित हो गए है (जैसे हस्त से 'हाथ')।
- देशी: स्थानीय भाषाओं के शब्द (जैसे रोड़ा, बैंगन)।
- संकर: दो भाषाओं के मेल से बने शब्द (जैसे टिकट + घर)।
- विदेशी: अरबी, फारसी, तुर्की, अंग्रेजी (जैसे अखबार, आदत, तोप, पुलिस)।
- रुढ़: जो अन्य शब्दो के योग से न बने हों (जैसे कमल, जल)।
- यौगिक: जो दो शब्दो मे योग से बनते है (जैसे विद्यालय = विद्या+आलय)।
- योगरुढ़: विशेष अर्थ प्रकट करने वाले (जैसे- दशानन, लम्बोदर)।
3. संज्ञा (Noun)
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, जाति या भाव के नाम को संज्ञा कहते है। जैसे श्रीराम, करनाल, वन, फल, ज्ञान。
- व्यक्तिवाचक: विशेष व्यक्ति, वस्तु, स्थान का बोध (जैसे सीता, रामायण, गंगा)।
- जातिवाचक: जाति या वर्ग विशेष का बोध (जैसे पुरुष, छात्र, नदी, पशु)।
- भाववाचक: गुण-दोष, दशा आदि के भाव का बोध (जैसे बचपन, मिठास, घबराहट)।
- समुदायवाचक: समुदाय का बोध (जैसे कक्षा, सेना, भीड़)।
- द्रव्यवाचक: द्रव्य या धातु का बोध (जैसे घी, तेल, लोहा)।
4. सर्वनाम (Pronoun)
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले विकारी शब्दों को सर्वनाम कहते हैं。
- पुरुषवाचक: उत्तम (मै, हम), मध्यम (तुम, आप), अन्य (वह, यह)।
- निश्चयवाचक: यह, वह।
- अनिश्चयवाचक: कोई, कुछ।
- सम्बन्धवाचक: जो, सो, जिसकी, उसकी।
- प्रश्नवाचक: कौन, किसकी।
- निजवाचक: अपना, अपने आप, स्वयं।
5. विशेषण (Adjective)
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, मात्रा या परिमाण आदि) बताते हैं。
- गुणवाचक: अच्छा, बुरा, सफेद, काला, रोगी, मोटा, मीठा।
- परिमाणवाचक: दस क्विटल, तीन किलो (निश्चित), थोड़ा, इतना, बहुत (अनिश्चित)।
- संख्यावाचक: दो, तीन (निश्चित), कई, कुछ, काफी (अनिश्चित)।
- सार्वनामिक: यह विद्यालय, वह बालक।
6. क्रिया (Verb)
जिस शब्द के द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है उसे क्रिया कहते हैं。
- सकर्मक क्रिया: व्यापार का फल कर्म पर पडे (जैसे वह पुस्तक पढता हैं)।
- अकर्मक क्रिया: व्यापार का फल कर्ता पर पड़े (जैसे मुकेश सोता हैं, सीता रोती है)।
- सामान्य क्रिया: केवल एक क्रिया का प्रयोग।
- संयुक्त क्रिया: दो या दो से अधिक धातुओं से मिलकर बनने वाली (जैसे- लिखना चाहता है)।
- नामधातु क्रिया: हथियाना, बतियाना, लतियाना।
- प्रेरणार्थक क्रिया: जब कर्ता अन्य को कार्य करने की प्रेरणा देता है (जैसे पढ़वाता है)।
- पूर्वकालिक क्रिया: सीता खाना खाकर स्कूल जाएगी।
7. अविकारी शब्द (अव्यय)
जो शब्द लिंग, वचन, कारक, पुरुष और काल के कारण नहीं बदलते, वे अव्यय कहलाते हैं。
- क्रिया विशेषण: कालवाचक (अभी, परसों), स्थानवाचक (यहाँ, बाहर), परिमाणवाचक (बहुत, थोड़ा), रीतिवाचक (शनैः शनैः)।
- सम्बन्ध बोधक: के बिना, के अलावा, के साथ।
- समुच्चय बोधक: और, तथा, किन्तु, परन्तु, इसलिए।
- विस्मयादि बोधक: ओह!, हे !, वाह!, अरे!।
8. काल (Tense)
क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं。
- वर्तमान काल: सामान्य वर्तमान, अपूर्ण वर्तमान (काम जारी है), संदिग्ध वर्तमान।
- भूतकाल: सामान्य भूत, आसन्न भूत (अभी-अभी पूरा हुआ), पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत, हेतु हेतुमद भूत (शर्त पाई जाए)।
- भविष्य काल: सामान्य भविष्य, सम्भाव्य भविष्य।
9. वाच्य (Voice)
- कर्तृवाच्य: कर्ता मुख्य हो (लड़किया बाजार जा रही है)।
- कर्मवाच्य: कर्म मुख्य हो (लड़कियों द्वारा बाजार जाया जा रहा है)।
- भाववाच्य: अकर्मक क्रिया का भाव मुख्य हो (हमसे वहाँ नहीं ठहरा जाता)।
10. वाक्य (Sentence)
सार्थक शब्द या शब्दों का वह समूह जिससे वक्ता का भाव स्पष्ट हो जाए। अंग: उद्देश्य और विधेय。
- सरल वाक्य: एक उद्देश्य और एक विधेय (राम ने रावण को मारा)।
- मिश्रित वाक्य: एक उपवाक्य प्रधान और दूसरा आश्रित (जब मै घर से निकला तब वर्षा हो रही थी)।
- संयुक्त वाक्य: दो या अधिक सरल वाक्य जुड़े हों (रमेश ने काम किया और वह अपने घर चला गया)।
अर्थ के आधार पर: विधानवाचक, नकारात्मक, आज्ञार्थक, प्रश्नवाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक, विस्मयादिबोधक, संकेतवाचक。
11. उपसर्ग और प्रत्यय
- संस्कृत उपसर्ग: प्र, सम्, अव, निर्, दुस्, दुर्, नि, अधि, उत्, अति, सु, अभि, प्रति, परि, उप, सत्।
- हिन्दी उपसर्ग: अन (अनपढ़), भर (भरपूर), नि (निडर), सु (सुपुत्र), दु (दुबला)।
- विदेशी उपसर्ग: डिप्टी, हाफ, कम, खुश, ना, बा, बे, बद, सर, हम, हर।
- कृत प्रत्यय: 'हार' (होनहार), 'ऊ' (खाऊ), 'आई' (लड़ाई), 'आवा' (दिखावा), 'ना' (दौड़ना)।
- तद्धित प्रत्यय: 'वाला' (सब्जीवाला), 'वान', 'इक', 'ता', 'पन', 'वट', 'कार'।
12. सन्धि (Sandhi)
अति समीप आए हुए दो वर्णों को मिलाने से जो परिवर्तन होता है。
- स्वर सन्धि: दीर्घ सन्धि (धर्म + अर्थ = धर्मार्थ), यण सन्धि (अति + आवश्यक = अत्यावश्यक), गुण संधि (नर + ईश = नरेश), वृद्धि सन्धि (तथा + एव = तथैव), अयादि सन्धि (ने + अन = नयन)।
- व्यंजन संधि: उत् + चारण = उच्चारण, जगत् + नाथ = जगन्नाथ।
- विसर्ग सन्धि: मनः + रमा = मनोरमा, निः + मल = निर्मल।
13. समास (Samas)
- अव्ययीभाव: यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), रातों रात।
- तत्पुरूष: हवन सामग्री, धनहीन, राजपुत्र।
- कर्मधारय: चन्द्रमुख (चन्द्र जैसा मुख), नीलकण्ठ, महाराज।
- द्विगु: नवरत्न (नौ रत्नों का समूह), तिरंगा।
- द्वन्द्व: माता-पिता (माता और पिता), दिन-रात।
- बहुब्रीहि: गजानन (गज के समान आनन है जिसका- गणेश), दशानन।
14. अलंकार (Alankar)
- शब्दालंकार: अनुप्रास (चारू चंद्र की चंचल किरणे), यमक (कनक-कनक ते सौगुनी), श्लेष (रहिमन पानी राखिए)।
- अर्थालंकार: उपमा (पीपर पात सरिस मन डोला), रूपक (मैया! मै तो चन्द्र खिलौना लैहों), उत्प्रेक्षा (मानहुँ नीलमनि सैल पर)।
15. वर्तनी शुद्धि
| अशुद्ध शब्द | शुद्ध शब्द | अशुद्ध शब्द | शुद्ध शब्द |
|---|---|---|---|
| आदर्णीय | आदरणीय | उज्वल | उज्ज्वल |
| कवियात्री | कवयित्री | अहिल्या | अहल्या |
| सन्यासी | संन्यासी | श्रृष्टा | स्रष्टा |
| आधीन | अधीन | अनधिकार | अनाधिकार |
| ज्योत्सना | ज्योत्स्ना | उछृंखल | उच्छृंखल |
| निरोग | नीरोग | चेष्ठा | चेष्टा |
16. तत्सम-तद्भव शब्द
| तत्सम | तद्भव | तत्सम | तद्भव |
|---|---|---|---|
| अस्थि | हड्डी | कर्ण | कान |
| आम्र | आम | कोकिल | कोयल |
| उष्ट्र | ऊँट | घृत | घी |
| क्षेत्र | खेत | दधि | दही |
| ग्राम | गाव | दुग्ध | दूध |
| अश्रु | आँसू | सूर्य | सूरज |
| ओष्ठ | होंठ | जिह्वा | जीभ |
| मक्षिका | मक्खी | हस्त | हाथ |
| प्रस्तर | पत्थर | सर्प | सांप |
| अग्नि | आग | चटका | चिड़िया |
17. महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द
- अमृत: पीयूष, सुधा, अमिय, जीवनदायक, अमित, जीवन।
- आग: पावक, दहन, अनल, ज्वलन, अग्नि, वैश्वानर, वह्नि।
- आकाश: ख, नभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अनन्त।
- कमल: पद्म, अरविन्द, नलिन, सरसिज, सरोज, राजीव, जलज, पंकज।
- गंगा: विष्णुपदी, जाह्नवी, भागीरथी, त्रिपथगा, सुरनदी, देवनदी।
- दिन: दिवस, वासर, तिथि, तारीख, वार, अहन्।
- पृथ्वी: भू, भूमि, धरा, वसुधा, वसुंधरा, धरती, मही।
- बादल: अभ्र, मेघ, वारिवाह, बलाहक, जलधर, वारिद, जलद।
18. विलोम शब्द
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
|---|---|---|---|
| अतिवृष्टि | अनावृष्टि | उग्र | सौम्य |
| अथ | इति | अमृत | विष |
| अनुराग | विराग | कृतज्ञ | कृतघ्न |
| आकर्षण | विकर्षण | जंगम | स्थावर |
| निंदा | स्तुति/प्रशंसा | सत्कार | तिरस्कार |
| उत्कर्ष | अपकर्ष | मूक | वाचाल |
19. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
- जो क्षमा न किया जा सके - अक्षम्य
- जहाँ पहुँचा न जा सके - अगम्य
- जिसका जन्म पहले हुआ हो - अग्रज
- जिसका जन्म बाद / पीछे हुआ हो - अनुज
- जिसके समान दूसरा न हो - अद्वितीय
- जो सोचा भी न गया हो - अतर्कित
- जिसे काटा न जा सके - अकाट्य
- दोपहर के बाद का समय - अपराह्न
- जो थोड़ा जानता हो - अल्पज्ञ
- बिना वेतन के - अवैतनिक
- सिर से लेकर पैर तक - आपादमस्तक
- जिसकी आशा न की गई हो - अप्रत्याशित
- जिसे मापा न जा सके - अपरिमेय
- सौ वर्षों का समूह - शताब्दी
- हाथ की लिखी पुस्तक या मसौदा - पांडुलिपि
- मरने के करीब - मुमूर्षु / मरणासन्न
- खाने की इच्छा - बुभुक्षा
- जीने की इच्छा - जिजीविषा
- जो अपने से उत्पन्न हुआ हो - स्वयंभू
- जिसका दमन करना कठिन हो - दुर्दम्य
20. मुहावरे और कहावतें
प्रमुख मुहावरे
- अंक भरना: लिपटा लेना
- आँख का अंधा गाँठ का पूरा: धनी पर मूर्ख / मूर्ख धनवान
- आसमान टूट पड़ना: अचानक आफत आना
- ईंट तक बिकवाना: दरिद्र बना देना
- खून सफेद होना: कृतघ्न होना
- छाती पर साँप लोटना: जलना
- धूल चाटना: गिड़गिड़ाना/गिरना
- बहती गंगा में हाथ धोना: जहाँ सभी फायदे उठा रहे हैं, वहाँ फायदा उठाना
- हवाइयाँ छूटना: चेहरा फक्क हो जाना
प्रमुख कहावतें
- अधजल गगरी छलकत जाय: अज्ञानी ही बढ-चढकर ज्ञान की बातें करता है।
- अंधों के आगे रोना, अपना दीदा खोना: नासमझ को समझाने का व्यर्थ प्रयास।
- ऊधो का लेना न माधो का देना: बिल्कुल निश्चित।
- चोर की दाढ़ी मे तिनका: अपराधी हमेंशा सशंकित रहता है।
- ढाक के तीन पात: परिणाम कुछ भी नहीं (हमेशा एक सा)।
- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे: गुस्सेवाला व्यक्ति दूसरों पर अपना गुस्सा निकालता है।
- चट मँगनी पट ब्याह: किसी काम का जल्दी संपन्न होना।
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