पाठ्यपुस्तक 'वाटिका-5' के पाठ 1 'विमल इंदु की विशाल किरणें' के सभी प्रश्नों के पूर्ण हल दिए गए हैं:
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हिंदी कक्षा : 5
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वाटिका-5 : पाठ 1- विमल इंदु की विशाल किरणें
यहाँ आपकी पाठ्यपुस्तक 'वाटिका-5' के पाठ 'विमल इंदु की विशाल किरणें' के सभी प्रश्नों के पूर्ण हल दिए गए हैं:
1. बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए
(क)
ईश्वर की महिमा प्रकृति के किन-किन रूपों में दिखायी दे रही है? दिए गए उत्तरों को सही क्रम में लिखिए -
| ईश्वर का प्रकाश | = | विमल इंदु की विशाल किरणों के रूप में |
| उसकी दया का प्रसार | = | सागर के रूप में |
| उसकी प्रशंसा के राग | = | सागर की लहरों के गान (तरंगमालाओं) में |
| ईश्वर का मंद हास | = | चाँदनी के रूप में |
| ईश्वर के हँसने की धुन | = | नदियों के निनाद (कल-कल ध्वनि) में |
(ख)
परमात्मा को 'दयानिधि' क्यों कहा गया है?
उत्तर: परमात्मा को 'दयानिधि' इसलिए कहा गया है क्योंकि वे दया के भंडार हैं। संसार के सभी जीवों पर उनकी कृपा और दया हमेशा बनी रहती है।
(ग)
तरंगमालाएँ क्या कर रही हैं?
उत्तर: तरंगमालाएँ (सागर की लहरें) ईश्वर की प्रशंसा का राग गा रही हैं।
(घ)
प्रभु की दया की तुलना सागर से क्यों की गई है?
उत्तर: जिस प्रकार सागर विशाल, असीम और गहरा होता है, उसी प्रकार ईश्वर की दया भी अनंत है जिसका कोई अंत नहीं है। वह पूरी सृष्टि में फैली हुई है।
2. पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क)
"तुम्हारे हँसने की धुन में नदियाँ, निनाद करती ही जा रही हैं।"
भाव: कवि का तात्पर्य है कि नदियों के बहने से जो मधुर 'कल-कल' की ध्वनि (निनाद) निकलती है, वह ऐसी प्रतीत होती है मानो ईश्वर स्वयं खिलखिलाकर हँस रहे हों। प्रकृति का कण-कण ईश्वर की प्रसन्नता को दर्शाता है।
(ख)
"तेरी प्रशंसा का राग प्यारे, तरंगमालाएँ गा रही हैं।"
भाव: सागर में उठने वाली अनगिनत लहरें जब किनारे से टकराती हैं या शोर करती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वे सामूहिक रूप से ईश्वर की महिमा और उनकी महानता के गीत गा रही हैं।
3. सोच-विचार : बताइए
(क)
प्रकृति द्वारा निर्मित दस चीजों के नाम:
1. सूर्य, 2. चंद्रमा, 3. नदियाँ, 4. पर्वत, 5. वृक्ष, 6. तारे, 7. फूल, 8. हवा, 9. मिट्टी, 10. बारिश
(ख)
मानव द्वारा निर्मित बीस चीजों के नाम:
1. कलम
2. कागज़
3. मेज़
4. कुर्सी
5. मोबाइल
6. कंप्यूटर
7. कार
8. साइकिल
9. घर
10. कपड़े
11. पंखा
12. घड़ी
13. जूते
14. बोतल
15. सड़क
16. पुल
17. हवाई जहाज़
18. रेलगाड़ी
19. बिजली
20. टेलीविज़न
4. भाषा के रंग
(क)
नीचे लिखे शब्दों के तुकांत शब्द (Rhyming Words) लिखिए:
| इंदु | : | बिंदु |
| धुन | : | गुन / बुन |
| माया | : | छाया / काया |
| लीला | : | पीला / शीला |
| मिला | : | खिला / सिला |
(ख)
नीचे दिए गए शब्दों के समानार्थी (Synonyms) शब्द लिखिए:
| प्रकाश | : | रोशनी / उजाला |
| सागर | : | समुद्र / जलधि |
| मनोरथ | : | इच्छा / कामना |
| जगत | : | संसार / दुनिया |
| तरंग | : | लहर / हिलोर |
5. तुम्हारी कलम से
प्रश्न: सुबह-शाम के दृश्यों को देखकर जो छवि आपके मन में उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: सुबह का समय नई ऊर्जा लेकर आता है। सूरज की पहली किरण के साथ पक्षियों का चहचहाना और ठंडी हवा मन को शांति देती है। शाम का समय ढलते सूरज की लालिमा के साथ बहुत शांत और सुंदर होता है। आसमान में छाई नारंगी आभा और घर लौटते पक्षियों का दृश्य दिनभर की थकान मिटा देता है।
7. इस कविता को ध्यान पूर्वक पढ़िए (द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता)
इस कविता पर आधारित तीन प्रश्न:
1. नन्हा पथिक विश्व के पथ पर क्या सीख रहा है?
2. कवि ईश्वर से धरती को क्या बनाने का वरदान माँग रहा है?
3. कवि की अपनी 'मनोकामना' के बारे में क्या इच्छा है?
कविता का मनचाहा शीर्षक:
'नन्हा पथिक' या 'मंगलमय वर'
कविता पर चित्र:
(इसके लिए आप एक छोटे बच्चे का चित्र बना सकते हैं जो सूरज की किरणों की ओर बढ़ रहा हो, या एक सुंदर उपवन का दृश्य बना सकते हैं।)
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